देश में मार्च के पहले हफ्ते में LPG की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सरकारी तेल कंपनियों के आंकड़ों के अनुसार LPG की मांग में करीब 17% की कमी आई है। इस गिरावट के पीछे वेस्ट एशिया में बने तनाव और सप्लाई पर पड़े दबाव को अहम वजह माना जा रहा है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च के पहले हफ्ते LPG की खपत 1.147 मिलियन टन रही। जो पिछले साल इसी अवधि में 1.387 मिलियन टन थी। यानी सालाना आधार पर 17% गिरावट LPG की खपत में देखी गई है। वहीं फरवरी के पहले पखवाड़े की तुलना में मार्च में LPG खपत 26.3% तक कम रही। इसके उलट अन्य ईंधनों की मांग बढ़ोतरी हुई है जिसमें पेट्रोल 13.2% बढ़कर 1.5 मिलियन टन तक पहुंचा वहीं डीजल 8.2% बढ़कर 3.384 मिलियन टन हो गया है।
लोकलसर्कल्स के सर्वे में LPG की किल्लत और महंगाई का सीधा असर खाने-पीने पर दिखा है। देश के 309 जिलों में 38,000 उपभोक्ताओं की राय के आधार पर किए गए सर्वे में सामने आया कि 57% रेस्टोरेंट्स ने खाने के दाम बढ़ाए हैं। वहीं 54% स्ट्रीट वेंडर्स ने कीमतें 10-25% तक बढ़ाई हैं। साथ ही 50% से ज्यादा लोगों ने महंगे खाने की शिकायत की
कई रेस्टोरेंट्स बिल में अलग से ₹15 या ज्यादा ‘LPG रिवीजन चार्ज’ जोड़ रहे हैं। वहीं वेंडर्स को ब्लैक मार्केट में ₹400 प्रति किलो तक गैस खरीदनी पड़ रही है जिससे लागत बढ़ने का पूरा बोझ ग्राहकों पर डाला जा रहा है।
कमर्शियल गैस की किल्लत से छोटे व्यवसाय सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, बेंगलुरु और पुणे में होटल्स ने वर्किंग आवर्स घटाए वहीं कई जगह मेन्यू आइटम्स कम किए गए हैं। भोपाल और रांची में स्ट्रीट वेंडर्स ने काम अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। वहीं कई दुकानदार अब लकड़ी, कोयला और इंडक्शन का सहारा ले रहे हैं
केंद्र सरकार का कहना है कि देश में घरेलू LPG की कोई कमी नहीं है और सप्लाई सामान्य बनी हुई है।
सप्लाई को सुचारू रखने के लिए सरकार और एजेंसियां लगातार काम कर रही हैं। LPG की ऑनलाइन बुकिंग करीब 94% तक पहुंच गई है। रिफाइनरियों में उत्पादन भी 38% बढ़ाया गया है। साथ ही होटल-रेस्टोरेंट को PNG अपनाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
वेस्ट एशिया में तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी LPG जरूरत का 60% से ज्यादा आयात करता है, जिसमें से 80-85% इसी रूट से आता है। हालांकि सप्लाई बनाए रखने के लिए ‘नंदा देवी’ जहाज से 46,500 मीट्रिक टन LPG वडिनार पोर्ट आ चुकी है। ‘शिवालिक’ जहाज पहले ही मुंद्रा पोर्ट पहुंच चुका है। वहीं पश्चिमी खाड़ी में 22 भारतीय जहाज सक्रिय हैं
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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही बने रहे तो कमर्शियल LPG की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है। इसका असर होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड के दामों पर आगे भी देखने को मिल सकता है। इस पूरी स्थिति में सबसे बड़ा असर आम उपभोक्ता पर पड़ रहा है, जिसे अब खाने-पीने से लेकर रोजमर्रा के खर्च तक हर जगह महंगाई का सामना करना पड़ रहा है।