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Maharashtra Local Elections :मुंबई के बाद अब नागपुर में खलबली, स्थानीय नेताओं ने किया विद्रोह तो BJP ने किया 6 साल के लिए सस्पेंड

मुंबई के अंबरनाथ में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान स्थानीय BJP नेताओं ने अपनी मर्जी से कांग्रेस और राकांपा से गठबंधन कर लिया था, वहीं अकोट में AIMIM से हाथ मिला लिया था। अब पार्टी की नागपुर यूनिट में खलबली है। यहां पार्टी नेताओं ने बगावत कर डाली। ऐसे में 32 नेताओं को 6 साल के लिए सस्पेंड कर दिया गया है। 
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मुंबई के बाद अब नागपुर में खलबली, स्थानीय नेताओं ने किया विद्रोह तो BJP ने किया 6 साल के लिए सस्पेंड
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नागपुर। नागपुर महानगरपालिका चुनाव के बीच BJP ने सख्त कदम उठाते हुए संगठन के भीतर अनुशासन का मजबूत संदेश दिया है। पार्टी ने अनुशासनहीनता और पार्टी लाइन से हटकर गतिविधियों के आरोप में 32 कार्यकर्ताओं को सीधे छह साल के लिए निलंबित कर दिया। खास बात यह है कि इन निलंबित नेताओं में पूर्व नगरसेवक और उनके समर्थक भी शामिल हैं।

    टिकट वितरण के बाद असंतोष

    दरअसल, टिकट वितरण के बाद पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी सुलग उठी थी। करीब 100 से अधिक कार्यकर्ताओं ने बगावती तेवर दिखाते हुए नामांकन दाखिल कर दिया था। BJP नेतृत्व ने संवाद और समझाइश के जरिए 96 बागियों को मनाने में सफलता हासिल कर ली, जिन्होंने अपने नामांकन वापस ले लिए। लेकिन कुछ नेताओं ने पार्टी की चेतावनी को नजरअंदाज किया और चुनाव मैदान में डटे रहे। इन्हीं के खिलाफ अब कड़ी कार्रवाई की गई है।

    निलंबन वाली सूची में चर्चित नाम

    निलंबित सूची में कुछ चर्चित नाम भी शामिल हैं। पूर्व महापौर अर्चना डेहनकर के पति विनायक डेहनकर, वरिष्ठ नगरसेवक रहे सुनील अग्रवाल और सुनीता महल्ले जैसे नेताओं पर भी पार्टी की गाज गिरी है। BJP के शहर अध्यक्ष दयाशंकर तिवारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव के समय पार्टी का निर्णय अंतिम होता है और अधिकृत उम्मीदवार के खिलाफ खड़ा होना संगठनात्मक मर्यादा का उल्लंघन है।

    सस्पेंड नेता बोले टिकट कटने की वजह नहीं बताई

    दिलचस्प बात यह है कि निलंबित कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें टिकट कटने की वजह नहीं बताई गई और स्थानीय जनता के दबाव में उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला किया। हालांकि, उन्होंने पार्टी के फैसले को उसका अधिकार बताते हुए किसी तरह की नाराजगी से इनकार किया है। नागपुर की सियासत में यह कार्रवाई लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहने वाली है। गौरतलब है कि स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा, कांग्रेस समेत अन्य पार्टिंयों को इस तरह की स्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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