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कुंभ 2027 में फर्जी साधुओं पर लगेगी रोक,महंत पुरी ने आईडी व्यवस्था का प्रस्ताव दिया

हरिद्वार कुंभ 2027 में महंत रविंद्र पुरी ने साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए आईडी अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखा। फर्जी साधुओं पर लगेगी रोक, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन मजबूत होगा। भगवा वस्त्रों के दुरुपयोग और संदिग्ध गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए यह पहल लागू की जाएगी।
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महंत पुरी ने आईडी व्यवस्था का प्रस्ताव दिया
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने हरिद्वार कुंभ 2027 के आयोजन को और अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक अनूठा प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विशाल मेले में आने वाले सभी साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए पहचान पत्र (आईडी) अनिवार्य किया जाए। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि आईडी व्यवस्था लागू होने से फर्जी साधुओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा और सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन तथा आयोजन की सुव्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।

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    प्रस्ताव का उद्देश्य

    महंत रविंद्र पुरी के अनुसार कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। ऐसे विशाल आयोजन में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।

    आईडी सिस्टम लागू होने से निम्नलिखित फायदे होंगे:

    1. मेले में आने-जाने वालों की निगरानी करना आसान होगा।
    2. भीड़ नियंत्रण में सुधार आएगा।
    3. संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा सकेगी।
    4. पूरे आयोजन की सुरक्षा और व्यवस्था में मजबूती आएगी।

    भगवा वस्त्रों के दुरुपयोग पर रोक

    महंत रविंद्र पुरी ने चेतावनी दी कि कुछ असामाजिक तत्व भगवा वस्त्र पहनकर लोगों की आस्था का गलत फायदा उठाते हैं और ठगी जैसी घटनाओं में शामिल होते हैं। आईडी प्रणाली लागू होने से असली और नकली साधु-संत में अंतर करना आसान हो जाएगा और श्रद्धालुओं को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा।

    ‘कालनेमि’ अभियान का महत्व

    महंत ने उत्तराखंड सरकार के ‘कालनेमि’ अभियान की सराहना की, जो धार्मिक स्थलों पर फर्जी साधुओं और असामाजिक तत्वों की पहचान और कार्रवाई को सुनिश्चित करता है। उन्होंने इस अभियान को देशभर के कुंभ स्थलों पर लागू करने की भी बात कही, ताकि फर्जी साधुओं पर रोक लगे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

    अखाड़ों में पहले से मौजूद पहचान व्यवस्था

    महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उनके अखाड़ों में पहले से ही साधु-संतों का सत्यापन होता है। इस प्रक्रिया से संदिग्ध या फर्जी साधुओं की पहचान करना संभव होता है। आईडी सिस्टम लागू होने पर यह व्यवस्था और अधिक व्यापक और प्रभावी बन जाएगी।

    प्रस्ताव के लागू होने की प्रक्रिया

    यह प्रस्ताव फिलहाल प्रारंभिक चरण में है। अखाड़ा परिषद जल्द ही मेला प्रशासन से औपचारिक बातचीत करेगी और सिस्टम लागू करने के लिए अंतिम मंजूरी प्राप्त करेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ, तो कुंभ मेला 2027 में पहचान और सुरक्षा के नए मानक स्थापित होंगे। महंत ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा कुंभ मेला हो सकता है जहां बड़े पैमाने पर आईडी सिस्टम लागू होगा और हर श्रद्धालु तथा साधु-संत की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।

    सुरक्षा और प्रबंधन में बदलाव

    आईडी लागू होने से कुंभ मेले में एंट्री पूरी तरह व्यवस्थित हो सकेगी। साथ ही:

    1. सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ प्रबंधन में सुधार होगा।
    2. फर्जी साधुओं की गतिविधियों पर रोक लगेगी।
    3. श्रद्धालुओं के लिए आयोजन और अधिक सुरक्षित बन जाएगा।

    इस पहल से पूरे कुंभ आयोजन में अनुशासन और सुव्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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