हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने हरिद्वार कुंभ 2027 के आयोजन को और अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक अनूठा प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विशाल मेले में आने वाले सभी साधु-संतों और श्रद्धालुओं के लिए पहचान पत्र (आईडी) अनिवार्य किया जाए। महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि आईडी व्यवस्था लागू होने से फर्जी साधुओं पर नियंत्रण रखा जा सकेगा और सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन तथा आयोजन की सुव्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा।
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महंत रविंद्र पुरी के अनुसार कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु एकत्र होते हैं। ऐसे विशाल आयोजन में सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और व्यवस्था बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है।
महंत रविंद्र पुरी ने चेतावनी दी कि कुछ असामाजिक तत्व भगवा वस्त्र पहनकर लोगों की आस्था का गलत फायदा उठाते हैं और ठगी जैसी घटनाओं में शामिल होते हैं। आईडी प्रणाली लागू होने से असली और नकली साधु-संत में अंतर करना आसान हो जाएगा और श्रद्धालुओं को धोखाधड़ी से बचाया जा सकेगा।
महंत ने उत्तराखंड सरकार के ‘कालनेमि’ अभियान की सराहना की, जो धार्मिक स्थलों पर फर्जी साधुओं और असामाजिक तत्वों की पहचान और कार्रवाई को सुनिश्चित करता है। उन्होंने इस अभियान को देशभर के कुंभ स्थलों पर लागू करने की भी बात कही, ताकि फर्जी साधुओं पर रोक लगे और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
महंत रविंद्र पुरी ने बताया कि उनके अखाड़ों में पहले से ही साधु-संतों का सत्यापन होता है। इस प्रक्रिया से संदिग्ध या फर्जी साधुओं की पहचान करना संभव होता है। आईडी सिस्टम लागू होने पर यह व्यवस्था और अधिक व्यापक और प्रभावी बन जाएगी।
यह प्रस्ताव फिलहाल प्रारंभिक चरण में है। अखाड़ा परिषद जल्द ही मेला प्रशासन से औपचारिक बातचीत करेगी और सिस्टम लागू करने के लिए अंतिम मंजूरी प्राप्त करेगी। यदि यह प्रस्ताव लागू हुआ, तो कुंभ मेला 2027 में पहचान और सुरक्षा के नए मानक स्थापित होंगे। महंत ने कहा कि यह देश का पहला ऐसा कुंभ मेला हो सकता है जहां बड़े पैमाने पर आईडी सिस्टम लागू होगा और हर श्रद्धालु तथा साधु-संत की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
आईडी लागू होने से कुंभ मेले में एंट्री पूरी तरह व्यवस्थित हो सकेगी। साथ ही:
इस पहल से पूरे कुंभ आयोजन में अनुशासन और सुव्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलेगी।