कुदरत का खौफनाक सच :जब मां-बाप ही बन जाते हैं अपने बच्चों के शिकारी

प्रकृति को अक्सर हम खूबसूरती, संतुलन और जीवन देने वाली ताकत के रूप में देखते हैं लेकिन इसका एक बेहद डरावना और कठोर पक्ष भी है, जिसे जानकर रूह कांप सकती है। इंसानों की दुनिया में जहां माता-पिता अपने बच्चों के लिए हर त्याग करने को तैयार रहते हैं। वहीं जंगल और समुद्र की दुनिया में कई ऐसे जीव हैं, जहां हालात इसके बिल्कुल उलट होते हैं। विज्ञान की भाषा में इसे ‘कैनिबलिज्म’ कहा जाता है-यानी अपनी ही प्रजाति या संतान को खाना। यह सुनने में भले ही अमानवीय लगे लेकिन प्रकृति में यह एक तरह की सर्वाइवल स्ट्रेटेजी है। जब भोजन की कमी होती है या अस्तित्व पर खतरा मंडराता है तब कई जीव अपने ही बच्चों को शिकार बना लेते हैं, ताकि वे खुद जीवित रह सकें या अपनी प्रजाति के सबसे मजबूत जीन को आगे बढ़ा सकें।
ध्रुवीय भालू: भूख के आगे मातृत्व भी हार जाता है
Polar Bear
आर्कटिक क्षेत्र में रहने वाले ध्रुवीय भालू अपनी ताकत और शिकार कौशल के लिए जाने जाते हैं लेकिन बदलते जलवायु हालात ने इनके व्यवहार को और भी आक्रामक बना दिया है। जब इन्हें मुख्य भोजन- सील मछलियां नहीं मिलतीं, तो कई बार नर भालू छोटे शावकों को ही निशाना बना लेते हैं। ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण शिकार के मौके कम हो रहे हैं, जिससे यह खतरनाक प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है।
चिम्पैंजी: इंसानों जैसे, लेकिन बेहद हिंसक
Chimpanzee
चिम्पैंजी को इंसानों का सबसे करीबी रिश्तेदार माना जाता है, लेकिन इनका सामाजिक व्यवहार कई बार बेहद क्रूर हो सकता है। झुंडों के बीच होने वाली लड़ाइयों में ये दूसरे समूह के बच्चों को मारकर खा जाते हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में नर चिम्पैंजी अपने ही बच्चों को भी शिकार बना लेते हैं। यह व्यवहार अक्सर प्रभुत्व और संसाधनों पर नियंत्रण से जुड़ा होता है।
ये भी पढ़ें: 1 अप्रैल को क्यों बनाया जाता है ‘फूल’? हंसी-मजाक के पीछे छुपा है पुराना राज
‘कुर्सी’ के लिए मासूमों का कत्लेआम
Lion
‘जंगल के राजा’ की गद्दी पर बैठने का तरीका बहुत खौफनाक है। जब कोई नया शेर किसी झुंड का लीडर बनता है, तो वह सबसे पहले पुराने शेर के बच्चों की जान लेता है। मकसद सिर्फ एक है, अपनी हुकूमत और अपना वंश आगे बढ़ाना।
सैंड टाइगर शार्क: जन्म से पहले ही जंग
Sand Tiger Shark
समुद्र की दुनिया में यह कहानी और भी डरावनी हो जाती है। सैंड टाइगर शार्क के बच्चे मां के गर्भ में ही एक-दूसरे के दुश्मन बन जाते हैं। गर्भ में मौजूद सबसे ताकतवर भ्रूण अपने बाकी भाई-बहनों को खा जाता है। अंत में केवल वही जन्म लेता है, जो सबसे मजबूत होता है। इसे ‘इन्ट्रायूटेरिन कैनिबलिज्म’ कहा जाता है।
मुर्गी: पोषण की कमी बनती है वजह
Hen
घरेलू मुर्गियों में भी यह अजीब व्यवहार देखा जाता है। अगर उनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो जाए, तो वे अपने ही अंडों को खाने लगती हैं। एक बार यह आदत लगने पर उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। इसलिए किसान अक्सर नकली अंडों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि इस प्रवृत्ति को नियंत्रित किया जा सके।
ब्लैनी मछली: पिता की ‘बेचैनी’ बच्चों पर भारी
Blanny Fish
इस मछली की कहानी जरा हटकर है। अगर अंडों की संख्या कम हो, तो पिता बोर फील करने लगता है और दूसरी पार्टनर ढूंढने के चक्कर में अपने ही बच्चों को खाना शुरू कर देता है। आपको स्वार्थ की ऐसी मिसाल कहीं और नहीं मिलेगी।












