भारतीय नौसेना को मिली तीन नई ताकतें :PM मोदी ने INS दूनागिरी, अग्रय और संशोधक को किया कमीशन; जानिए इनकी खासियत

नई दिल्ली। भारत ने समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय नौसेना में एक साथ तीन स्वदेशी युद्धपोतों को शामिल किया। इनमें गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट INS दूनागिरी, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट INS अग्रय और आधुनिक सर्वे वेसल INS संशोधक शामिल हैं। तीनों जहाज भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।
कोलकाता में हुआ ऐतिहासिक कमीशनिंग समारोह
शनिवार को कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी पोर्ट पर भारतीय नौसेना के लिए खास समारोह आयोजित किया गया। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों युद्धपोतों को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े में शामिल किया। ये जहाज इसी साल 30 मार्च को नौसेना को सौंपे गए थे और अब आधिकारिक रूप से ऑपरेशनल सेवा में आ गए हैं।
PM मोदी बोले- भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि तीनों जहाज पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। इनके निर्माण में भारतीय इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और श्रमिकों की मेहनत शामिल है, जो आत्मनिर्भर भारत की ताकत को दिखाती है।
उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा क्षेत्र में केवल हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहना चाहता, बल्कि दुनिया के लिए आधुनिक रक्षा उपकरण और युद्धपोत बनाने वाला देश बनना चाहता है। उनके मुताबिक, जो देश निर्माण करता है, वही भविष्य में वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने की क्षमता भी रखता है।
समुद्री ताकत क्यों है इतनी जरूरी?
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज दुनिया का अधिकांश व्यापार समुद्री मार्गों से होता है। इंटरनेट और डेटा का बड़ा नेटवर्क भी समुद्र के नीचे बिछी केबलों से चलता है। आने वाले समय में डीप-सी मिनरल्स, नई ऊर्जा और समुद्री संसाधनों का महत्व और बढ़ने वाला है। ऐसे में जिस देश की नौसेना मजबूत होगी, उसकी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति भी उतनी ही मजबूत होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ साल पहले INS विक्रांत के शामिल होने के साथ भारत ने समुद्री शक्ति का नया अध्याय शुरू किया था और अब दूनागिरी, अग्रय और संशोधक उसी यात्रा को आगे बढ़ा रहे हैं।
जानिए तीनों नए वॉरशिप की खासियत
1. INS दूनागिरी: दुश्मन के लिए स्टील्थ मिसाइल फ्रिगेट
INS दूनागिरी प्रोजेक्ट-17A का पांचवां स्टील्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जबकि इसका निर्माण कोलकाता की गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है।

यह आधुनिक स्टील्थ तकनीक से लैस है, जिससे दुश्मन के रडार पर इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसमें सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल, बराक-8 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, आधुनिक सोनार, मल्टी-फंक्शन रडार, एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर और स्वदेशी वरुणास्त्र टॉरपीडो जैसे अत्याधुनिक हथियार लगाए गए हैं। जहाज पर हेलिकॉप्टर संचालन की सुविधा भी मौजूद है।
करीब 6,700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉट की रफ्तार से चल सकता है। इसके लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी हैं। नौसेना के अनुसार इसे पूर्वी नौसैनिक कमान और ईस्टर्न फ्लीट में तैनात किया जाएगा।
2. INS अग्रय: दुश्मन की पनडुब्बियों का सबसे बड़ा शिकारी
INS अग्रय अर्नाला क्लास का चौथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है। इसे खास तौर पर तटीय इलाकों और उथले समुद्री क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है।

इसमें हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर, 30 मिमी नेवल गन, हल-माउंटेड सोनार, वैरिएबल डेप्थ सोनार और अत्याधुनिक एंटी-सबमरीन सिस्टम लगाए गए हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका 'साइलेंट मोड' है, जिसके कारण यह बेहद कम आवाज करता है और दुश्मन के सोनार से बच सकता है।
यह करीब 25 नॉट की गति से चल सकता है और लगभग 3,300 किलोमीटर तक सफर कर सकता है। तटीय क्षेत्रों में यह 100 से 150 नॉटिकल मील की दूरी तक दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने में सक्षम है। इसके अलावा इसका उपयोग खोज एवं बचाव अभियानों और समुद्री निगरानी में भी किया जाएगा।
3. INS संशोधक: समुद्र की गहराइयों का वैज्ञानिक प्रहरी
INS संशोधक सर्वे वेसल (लार्ज) सीरीज का चौथा और अंतिम जहाज है। इसका काम युद्ध लड़ना नहीं बल्कि समुद्र की गहराई, समुद्री रास्तों और समुद्र तल का वैज्ञानिक सर्वे करना है।

यह हाइड्रोग्राफिक सर्वे, समुद्री डेटा संग्रह, समुद्री नक्शे (नॉटिकल चार्ट) तैयार करने और बंदरगाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसमें ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल (AUV), रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (ROV) और आधुनिक सर्वे सिस्टम लगाए गए हैं, जो समुद्र तल की स्कैनिंग और सटीक मैपिंग कर सकते हैं।
करीब 110 मीटर लंबे और लगभग 3,800 टन वजनी इस जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह लगातार 25 दिनों तक समुद्र में रह सकता है और इसकी अधिकतम गति 18 नॉट है।
सिर्फ 80 महीने में तैयार हुआ दूनागिरी
INS दूनागिरी की एक और खास उपलब्धि इसका कम निर्माण समय है। पहले इसी श्रेणी के जहाजों को बनाने में लगभग 93 महीने लगते थे, लेकिन पहले बने चार जहाजों के अनुभव के आधार पर दूनागिरी को केवल 80 महीनों में तैयार कर लिया गया। यह भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग की बढ़ती दक्षता का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
GRSE और भारतीय उद्योगों की बड़ी उपलब्धि
तीनों युद्धपोतों का निर्माण कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने किया है। इनके डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने तैयार किए हैं। इन जहाजों में बड़ी मात्रा में स्वदेशी उपकरणों और तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता और 'मेक इन इंडिया' अभियान को नई मजबूती मिली है।
पहले भी एक साथ शामिल हुए थे तीन वॉरशिप
यह पहली बार नहीं है जब भारतीय नौसेना में एक साथ तीन बड़े युद्धपोत शामिल किए गए हों। इससे पहले 15 जनवरी 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुंबई में INS नीलगिरी, INS सूरत और INS वागशीर को नौसेना में शामिल किया गया था। अब दूनागिरी, अग्रय और संशोधक के शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत और निगरानी क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है।
भारत की समुद्री सुरक्षा को मिलेगी नई मजबूती
इन तीनों स्वदेशी युद्धपोतों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की मिसाइल क्षमता, पनडुब्बी रोधी युद्धक क्षमता, समुद्री निगरानी और वैज्ञानिक सर्वेक्षण प्रणाली में बड़ा सुधार होगा। साथ ही यह भारत के आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र, स्वदेशी तकनीक और आधुनिक नौसैनिक शक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।











