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केरल में West Nile Fever का अलर्ट : राज्य में मिले 6 केस, मच्छरों के काटने से फैलती है बीमारी; जानें लक्षण

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केरल में West Nile Fever का अलर्ट : राज्य में मिले 6 केस, मच्छरों के काटने से फैलती है बीमारी; जानें लक्षण
कोझिकोड। केरल सरकार के हेल्थ डिपार्टमेंट ने राज्य में वेस्ट नाइल फीवर को लेकर अलर्ट जारी किया है। 6 लोगों के इसकी चपेट में आने के बाद कोझिकोड, त्रिशूर और मलप्पुरम में स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार (7 मई) को अलर्ट जारी किया। वहीं, त्रिशूर में इससे 79 साल के बुजुर्ग की मौत की खबर है। अगर सही समय पर बुखार का इलाज नहीं किया गया तो ये जानलेवा हो सकता है।

प्री-मानसून क्लीनिंग ड्राइव के निर्देश

पिछले सप्ताह केरल में स्वास्थ्य विभाग की उच्च स्तरीय बैठक हुई। जिसमें राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने सभी जिलों के प्री-मानसून क्लीनिंग ड्राइव के साथ निगरानी के निर्देश दिए हैं। जिला चिकित्सा पदाधिकारियों को गतिविधियां तेज करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि वे स्थानीय सरकारी निकायों के साथ मिलकर काम करें। जिला वेक्टर नियंत्रण इकाई द्वारा कई जगहों से सैंपल एकत्र किए गए हैं। सभी नमूनों को परीक्षण के लिए भेजा गया है। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने जागरुकता कार्यक्रम भी चलाने के लिए कहा है। वेस्ट नाइल फीवर के 10 में से 6 मामले में लक्षण नहीं दिखते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों का कोई ऑफिशियल डाटा शेयर नहीं किया है।

मच्छरों के काटने से होता है वेस्ट नाइल फीवर

US के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, वेस्ट नाइल बुखार वेस्ट नाइल वायरस (WNV) के कारण होने वाली बीमारी है। यह बीमारी संक्रमित मच्छरों के काटने से होती है। ये वायरस घातक न्यूरोलॉजिकल रोग का कारण बन सकता है। ऐसे में समय रहते इस बीमारी का इलाज नहीं मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संक्रमण से कुछ मामलों में हमेशा के लिए न्यूरोलॉजिकल डैमेज भी हो सकता है।

क्या हैं इसके लक्षण

वायरस से संक्रमित होने के बाद इसके लक्षण 3 से 14 दिनों के बीच तक दिख सकते हैं। वायरस से संक्रमित होने के बाद फ्लू जैसे बुखार, सिरदर्द, थकान, शरीर में दर्द, उल्टी और कभी-कभी स्किन पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण दिख सकते हैं। हालांकि, ज्यादातर लोगों में लक्षण नजर नहीं आते हैं। स्थिति गंभीर होने के बाद सिरदर्द, तेज बुखार, गर्दन में अकड़न, बेहोशी, कंपकंपी, शरीर में ऐंठन और मांसपेशियों में कमजोरी हो सकती है। वेस्ट नाइल फीवर आमतौर पर पक्षियों में फैलने वाली बीमारी है। इन पक्षियों से यह बीमारी मच्छरों तक फैलती है, जिसके बाद इन्हीं मच्छरों के काटने से यह इंसानों तक पहुंचती है। हालांकि, वेस्ट नाइल फीवर का एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैलना बहुत रेयर है।

वेस्ट नाइल फीवर से हो चुकी है मौत

केरल में पहला मामला 2011 में सामने आया था। वहीं 2019 में मालापुरम के एक 6 साल के लड़के की और 2022 में त्रिशूर के एक 47 साल के व्यक्ति की इस बीमारी से जान चली गई थी। कुछ मामलों में वेस्ट नाइल फीवर से एन्सेफलाइटिस यानी मस्तिष्क में सूजन और मेनिनजाइटिस यानी रीढ़ की हड्डी में सूजन जैसी न्यूरोलॉजिकल समस्याएं देखने को मिल सकती हैं, जो मौत तक का कारण बन सकती हैं। वेस्ट नाइल फीवर का सबसे पहला मामला 1937 में युगांडा में देखने को मिला था, जो क्यूलेक्स जीनस प्रजाति के मच्छर के काटने से फैला था। WHO के अनुसार, वेस्ट नाइल वायरस से संक्रमित 150 लोगों में से 1 में इसका गंभीर रूप देखने को मिल सकता है। ये भी पढ़ें- साइड इफेक्ट पर उठे सवालों के बीच AstraZeneca का बड़ा फैसला, दुनियाभर से वापस लेगी अपनी कोरोना वैक्सीन; इसी फॉर्मूले से भारत में Covishield बनी
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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