Katni News :जंगलों का 'कैंसर' अब लाएगा रोजगार, लैंटाना झाड़ी से बनेगी खाद और बायो-ईंधन

कटनी वन विभाग ने जंगलों और किसानों के लिए कैंसर कही जाने वाली झाड़ी लैंटाना का सदुपयोग शुरू किया है। अब इस झाड़ी से खाद और बायो फ्यूल बनाया जाएगा। बेंगलुरु की तकनीक से दाल मिलों में इसका ट्रायल सफल हुआ है।
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जंगलों का 'कैंसर' अब लाएगा रोजगार, लैंटाना झाड़ी से बनेगी खाद और बायो-ईंधन

अजय शर्मा, कटनी। जो विदेशी लैंटाना झाड़ी अब तक कटनी के जंगलों और किसानों के लिए 'कैंसर' बनी हुई थी, वह अब स्थानीय लोगों की तकदीर बदलने जा रही है। वन विभाग ने इस आक्रामक खरपतवार को सिरदर्द मानने के बजाय इसे रोजगार और पर्यावरण संरक्षण का जरिया बना दिया है। विभाग की इस नई पहल से न सिर्फ जंगलों को इस घातक झाड़ी से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बायो-ईंधन (पेलेट्स) और जैविक खाद का एक नया बाजार भी तैयार होगा।

बेंगलुरु के वैज्ञानिक ने बताया बायो मास पेलेट्स बनाने का तरीका 

डीएफओ गर्वित गंगवार ने बताया कि, कटनी वनमंडल ने इंस्टीट्यूट ऑफ वूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी बेंगलुरु के वैज्ञानक डॉ. रीतेश डेविड के मार्गदर्शन में लैंटाना की लकड़ी से बायो-मास पेलेट्स (ईंधन के छोटे टुकड़े) बनाने का सफल डेमन्स्ट्रेशन किया है।

कोयले का बेहतरीन विकल्प

आहूजा पेलेट निर्माता यूनिट में तैयार इन पेलेट्स का परीक्षण स्थानीय दाल मिलों में किया गया, जहां इसकी गुणवत्ता को कोयले के बेहतरीन विकल्प के रूप में सराहा गया। इसके अलावा, लैंटाना की पत्तियों से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बनाने की तैयारी भी पूरी हो चुकी है।

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जंगलों को मिलेगी नई जिंदगी

वन मंडल अधिकारी का कहना है कि अमेरिका से आई यह झाड़ी स्थानीय वनस्पतियों को नष्ट कर वनाग्नि का खतरा बढ़ा देती है। वन विभाग फिलहाल 'कट-रूट सिस्टम' से इसे हटा रहा है। अब इस हटाए गए मलबे का इस्तेमाल फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में होगा, जिससे ग्रामीणों को सीधे रोजगार मिलेगा।

चुनौती को अवसर में बदला, कमर्शियल मॉडल बनाया

लैंटाना हमारी जैव विविधता और वन्यजीवों के चारे के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। हमने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए इसका कमर्शियल मॉडल तैयार किया है। इससे फैक्ट्रियों को सस्ता हरित ईंधन मिलेगा और ग्रामीणों को रोजगार। फैक्ट्रियों और दाल मिलों में लैंटाना पेलेट्स का ट्रायल बेहद सफल रहा है। यदि यह मॉडल बड़े पैमाने पर कामयाब होता है, तो इसे प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकता है।

गर्वित गंगवार, वन मंडल अधिकारी, कटनी

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प्लांट में लैंटाना पेलेट्स का सफल प्रयोग किया

हमारा तुअर दाल का प्लांट है और रोजाना 40 टन तुअर को तैयार करने के लिए दो से तीन टन बायोमास पेलेट्स का उपयोग होता है। हमने अपनी प्लांट में लैंटाना पेलेट्स का सफलतापूर्व प्रयोग किया है। ये उतने ही अच्छे हैं जितने अन्य बायोमास पेलेट्स होते हैं।

जय गोडानी, डायरेक्टर, आरके दाल एंड प्रॉडक्ट्स लिमिटेड., कटनी

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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