पुरानी BS4-BS6 कारों के लिए बड़ी खुशखबरी !जल्द आएगी फ्लेक्स-फ्यूल किट, E85 और E100 इथेनॉल पर भी दौड़ेगी गाड़ी

देश में पेट्रोल के विकल्प के तौर पर इथेनॉल आधारित ईंधन को तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है। E20 के बाद अब सरकार E85 और E100 जैसे हाई इथेनॉल फ्यूल की दिशा में आगे बढ़ रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल उन करोड़ों लोगों के सामने था, जिनके पास BS4 और BS6 मानकों वाली पुरानी कारें हैं। क्या ये वाहन भविष्य में आने वाले नए ईंधन पर चल पाएंगे? अब इस सवाल का सकारात्मक जवाब सामने आया है।
इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के डायरेक्टर जनरल दीपक बलानी ने बताया है कि एक फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट की टेस्टिंग सफल रही है। इस किट को पुराने BS4 और BS6 चारपहिया वाहनों में लगाकर उन्हें E20 से लेकर E100 तक के इथेनॉल मिश्रित ईंधन के अनुकूल बनाया जा सकता है। यदि सरकार से मंजूरी मिलती है तो यह तकनीक वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।
इथेनॉल मिशन से देश को मिला बड़ा फायदा
दीपक बलानी के मुताबिक भारत ने तय समय से पहले E20 ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर लिया है। इसके साथ ही E100 फ्यूल को भी कानूनी मंजूरी मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से देश का कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने में मदद मिली है। उनके अनुसार E20 ब्लेंडिंग की वजह से भारत ने करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कच्चे तेल का आयात कम किया है। इससे लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बची है। वहीं इथेनॉल उत्पादन से किसानों को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिला है और लाखों किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है।
क्या है फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट?
फ्लेक्स-फ्यूल कन्वर्जन किट एक ऐसी तकनीक है, जो सामान्य पेट्रोल वाहनों को अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने के योग्य बनाती है। यह किट इंजन मैनेजमेंट सिस्टम को इस तरह तैयार करती है कि वाहन अलग-अलग इथेनॉल अनुपात वाले फ्यूल को आसानी से स्वीकार कर सके। दीपक बलानी ने बताया कि अमेरिका, ब्राजील और फिनलैंड जैसे देशों में इस तरह की तकनीक पहले से इस्तेमाल हो रही है। भारत में इसकी उपयोगिता जांचने के लिए दो साल पहले विदेश से किट मंगाकर परीक्षण कराया गया था।
आईआईटी दिल्ली ने किया 5 हजार किलोमीटर का ट्रायल
इस तकनीक की जांच के लिए आईआईटी दिल्ली को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। परीक्षण के दौरान एक मारुति डिजायर कार को E20, E85 और E100 फ्यूल के साथ अलग-अलग परिस्थितियों में चलाया गया। शहर की सड़कों से लेकर हाईवे तक करीब 5,000 किलोमीटर की ड्राइविंग के बाद इसके परिणामों का मूल्यांकन किया गया। दीपक बलानी ने बताया कि परीक्षण के दौरान वाहन में कोई बड़ी तकनीकी खराबी सामने नहीं आई। उत्सर्जन मानक भी निर्धारित सीमा के भीतर रहे। उन्होंने कहा कि वाहन ने सभी तरह के इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर संतोषजनक प्रदर्शन किया और किसी महत्वपूर्ण पुर्जे को नुकसान नहीं पहुंचा।
माइलेज थोड़ा घटेगा, लेकिन फ्यूल होगा सस्ता
विशेषज्ञों के अनुसार इथेनॉल की ऊर्जा क्षमता पेट्रोल की तुलना में कुछ कम होती है। इसी वजह से E20 या उससे अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर माइलेज में 4 से 5 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। हालांकि इसकी भरपाई ईंधन की कम कीमत से हो सकती है। हाल ही में दिल्ली में लॉन्च किए गए E85 फ्यूल की कीमत 82.12 रुपये प्रति लीटर रखी गई है, जबकि E20 पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये प्रति लीटर है। यानी उपभोक्ताओं को प्रति लीटर करीब 20 रुपये तक की बचत मिल सकती है।
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कितनी होगी किट की कीमत?
फिलहाल यह कन्वर्जन किट विदेश से आयात की जाती है, इसलिए इसकी लागत करीब 50 हजार रुपये तक पहुंचती है। लेकिन यदि सरकार इसे मंजूरी देती है और देश में इसका उत्पादन शुरू होता है तो कीमत काफी कम हो सकती है। दीपक बलानी का कहना है कि स्थानीय स्तर पर निर्माण होने के बाद इसकी संभावित कीमत 15 से 20 हजार रुपये के बीच रह सकती है। इससे लोगों को नई फ्लेक्स-फ्यूल कार खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे कम खर्च में अपनी मौजूदा कार को नए ईंधन के लिए तैयार कर सकेंगे।
अब सरकार के फैसले पर टिकी नजर
ISMA ने इस तकनीक की रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। साथ ही ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) से स्वतंत्र परीक्षण कराने का सुझाव भी दिया गया है। यदि सभी तकनीकी और नियामकीय मंजूरियां मिल जाती हैं तो आने वाले समय में BS4 और BS6 कार मालिकों के लिए यह किट एक किफायती और उपयोगी विकल्प बन सकती है। फिलहाल इसकी टेस्टिंग केवल चारपहिया वाहनों पर हुई है, लेकिन भविष्य में दोपहिया वाहनों के लिए भी ऐसी तकनीक विकसित किए जाने की संभावना जताई जा रही है।












