वाराणसी में आयोजित यह महानाट्य सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध विरासत को जीवंत करने का प्रयास रहा। दो राज्यों के सहयोग से हुआ यह आयोजन दर्शाता है कि संस्कृति के जरिए समाज को जोड़ने की अपार संभावनाएं हैं।
समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के ऐसे नायक हैं, जिनकी वीरता और न्यायप्रियता आज भी प्रेरणा देती है। इसी के साथ उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश मिलकर सांस्कृतिक विरासत को विकास से जोड़ने का काम कर रहे हैं, जो देश के लिए एक सकारात्मक पहल है।

महानाट्य के जरिए उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य के शौर्य, ज्ञान और न्याय की कहानियों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। 'सिंहासन बत्तीसी' और 'विक्रम-बेताल' जैसी लोककथाओं की झलकियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। नाट्य निर्देशक संजीव मालवीय ने इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताते हुए कहा कि दर्शकों का प्यार इस प्रस्तुति की सबसे बड़ी सफलता है।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने मालवा, निमाड़, डिंडौरी और सागर क्षेत्र की पारंपरिक प्रस्तुतियों से माहौल जीवंत कर दिया। मटकी नृत्य, गणगौर, गुदम्बबाजा और बरेदी जैसे लोकनृत्यों ने दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता से रूबरू कराया। लोक कला यात्रा के जरिए शहर में भी सांस्कृतिक झलक पेश की गई, जिसे लोगों ने खूब सराहा।

महानाट्य के साथ आयोजित प्रदर्शनी में भारतीय परंपरा, कृषि विज्ञान, शिव पुराण और पवित्र स्थलों की जानकारी दी गई। दर्शकों को सम्राट विक्रमादित्य से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों और अयोध्या से उनके संबंध के बारे में भी जानने का अवसर मिला। युवाओं ने इसे ज्ञानवर्धक बताते हुए कहा कि ऐसी पहल से नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है।