कर्नाटक में सत्ता परिवर्तन तय :सिद्धारमैया का इस्तीफा मंजूर, डीके शिवकुमार होंगे नए मुख्यमंत्री; नई कैबिनेट में हो सकते हैं 4 डिप्टी CM

बेंगलुरु। कर्नाटक की राजनीति में पिछले कई महीनों से चल रही खींचतान अब खत्म होती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का इस्तीफा आखिरकार राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने मंजूर कर लिया है। इसके साथ ही राज्य में नए नेतृत्व का रास्ता साफ हो गया है और मौजूदा डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना लगभग तय मानी जा रही है।
राज्यपाल की ओर से जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि नई सरकार के गठन तक सिद्धारमैया कार्यवाहक मुख्यमंत्री बने रहेंगे। वहीं कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद डीके शिवकुमार को औपचारिक रूप से विधायक दल का नेता चुना जा सकता है।
दिल्ली पहुंची कांग्रेस की टॉप लीडरशिप
इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों दिल्ली पहुंच गए हैं। यहां उनकी कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में नई कैबिनेट, मंत्रियों के नाम और सत्ता संतुलन पर चर्चा होगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डीके शिवकुमार अगले सप्ताह मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। शपथ ग्रहण 1 जून या 3 जून को होने की संभावना जताई जा रही है।
4 डिप्टी CM फॉर्मूले पर चर्चा
कांग्रेस इस बार कर्नाटक में बड़ा सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि नई सरकार में चार डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। इसका उद्देश्य अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देना बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, नई कैबिनेट में कई पुराने मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। करीब 10 मंत्रियों को हटाए जाने की चर्चा है। वहीं कुछ नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।
सिद्धारमैया और खड़गे परिवार की भूमिका भी अहम
नई कैबिनेट में सिद्धारमैया के बेटे और विधान परिषद सदस्य यतींद्र को शामिल किए जाने की चर्चा तेज है। कांग्रेस इसे सिद्धारमैया की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के संदेश के तौर पर देख रही है। इसके अलावा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बेटे और मौजूदा मंत्री प्रियंक खड़गे को भी डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। पार्टी के भीतर इसे संतुलन साधने की रणनीति माना जा रहा है।
ब्रेकफास्ट मीटिंग की तस्वीरें बनीं चर्चा का विषय
इस्तीफे से पहले सिद्धारमैया के घर हुई ब्रेकफास्ट मीटिंग भी काफी चर्चा में रही। इस दौरान डीके शिवकुमार ने सिद्धारमैया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। जवाब में सिद्धारमैया ने उन्हें गले लगाया। दोनों नेताओं की यह तस्वीर कांग्रेस के अंदर सत्ता परिवर्तन को सौहार्दपूर्ण तरीके से दिखाने की कोशिश मानी जा रही है।
क्यों बदला गया नेतृत्व?
कांग्रेस हाईकमान पिछले कुछ समय से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन पर विचार कर रहा था। पार्टी का मानना था कि सरकार पर बढ़ती एंटी-इंकम्बेंसी और वाल्मीकि डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन घोटाले जैसे मामलों से सरकार की छवि प्रभावित हो रही है। ऐसे में नेतृत्व बदलकर सरकार के प्रति जनता में नया संदेश देने की रणनीति तैयार की गई। पार्टी चाहती है कि अगले चुनावों से पहले संगठन और सरकार दोनों में नई ऊर्जा दिखाई दे।
3 दिन में खत्म हुई 3 साल की खींचतान
26 मई
कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार को दिल्ली तलब किया। राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ लंबी बैठक हुई। सूत्रों के अनुसार इसी दौरान नेतृत्व परिवर्तन का फैसला लगभग तय हो गया था।
27 मई
सिद्धारमैया ने संकेत दिए कि वे अगले दिन बड़ा फैसला लेंगे। उन्होंने मंत्रियों के साथ ब्रेकफास्ट मीटिंग भी बुलाई।
28 मई
सिद्धारमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि राज्यपाल शहर से बाहर थे, इसलिए उन्होंने अपना इस्तीफा राज्यपाल के विशेष सचिव को सौंपा।
29 मई
राज्यपाल थावर चंद गहलोत के बेंगलुरु लौटते ही इस्तीफा मंजूर कर लिया गया और नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो गया।
राज्यसभा और MLC चुनाव पर भी नजर
कांग्रेस अब केवल मुख्यमंत्री बदलने तक सीमित नहीं रहना चाहती। पार्टी राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों की रणनीति भी तैयार कर रही है। कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीटों पर चुनाव होना है। कांग्रेस दो सीटें आसानी से जीत सकती है, जबकि तीसरी सीट पर भी पार्टी मजबूत स्थिति में मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला उम्मीदवारों के नामों का पैनल तैयार करेंगे। साथ ही विधान परिषद की सात सीटों के लिए भी नामों पर चर्चा जारी है।
सिद्धारमैया ने राज्यसभा जाने से किया इनकार
इस्तीफा देने के बाद सिद्धारमैया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, पार्टी हाईकमान ने उन्हें राज्यसभा जाने का सुझाव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि, वे विधायक के रूप में जनता के बीच ही काम करते रहेंगे। सिद्धारमैया ने कहा कि, उन्होंने 50 साल की राजनीति में कभी पद और संपत्ति के पीछे राजनीति नहीं की। जनता की सेवा ही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण रही है।
कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती
कांग्रेस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती नई सरकार को स्थिर और संतुलित बनाए रखने की होगी। डीके शिवकुमार लंबे समय से मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जाहिर करते रहे हैं। वहीं सिद्धारमैया का अपना मजबूत जनाधार है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को दोनों गुटों के बीच संतुलन बनाकर सरकार चलानी होगी। आने वाले दिनों में नई कैबिनेट और डिप्टी सीएम फॉर्मूले से साफ हो जाएगा कि कांग्रेस ने सत्ता संतुलन के लिए क्या रणनीति बनाई है।











