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कानपुर में सुरक्षा को लेकर सख्ती:फिजिक्सवाला-विद्यापीठ समेत 16 कोचिंग सेंटर सील, 22 पर शिकंजा

लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। इसी कड़ी में कानपुर के काकादेव क्षेत्र में बड़ा अभियान चलाया गया, जहां फिजिक्सवाला और विद्यापीठ समेत कुल 16 नामचीन कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया।
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फिजिक्सवाला-विद्यापीठ समेत 16 कोचिंग सेंटर सील, 22 पर शिकंजा

उत्तर प्रदेश में हाल ही में लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। एक कोचिंग सेंटर में लगी आग ने कई जिंदगियां छीन लीं। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि इसमें कई छात्र अपनी जान नहीं बचा पाए। इस हादसे ने साफ कर दिया कि कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक भवनों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी कमजोर है।

हादसे के बाद पूरे प्रदेश में चिंता की लहर दौड़ गई। अभिभावक डरे हुए हैं और छात्र भी अपनी सुरक्षा को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इसी माहौल में प्रशासन अब पूरी तरह सख्त मोड में नजर आ रहा है।

कानपुर में प्रशासन का बड़ा अभियान शुरू

लखनऊ हादसे के बाद कानपुर विकास प्राधिकरण (KDA) ने तुरंत एक्शन लिया। शहर के काकादेव इलाके में, जो कोचिंग हब माना जाता है, वहां बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया गया। सुबह से ही अधिकारियों की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची। कई भवनों को चिन्हित किया गया और जांच के बाद 16 कोचिंग संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये सभी भवन या तो बिना अनुमति चल रहे थे या फिर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहे थे।

बिना सुरक्षा मानकों के चल रही थीं कई कोचिंग्स

जांच में कई गंभीर खामियां सामने आईं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि कई भवनों में फायर सेफ्टी की उचित व्यवस्था नहीं थी। कुछ जगहों पर आग बुझाने के उपकरण नहीं मिले, इमरजेंसी एग्जिट मौजूद नहीं था, नक्शा स्वीकृति (building approval) नहीं थी और कई अवैध निर्माण किए गए थे। इन खामियों को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए भवनों को सील कर दिया।

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छात्रों और अभिभावकों में बढ़ी चिंता

जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, कई कोचिंग सेंटरों में पढ़ाई कर रहे छात्रों में अफरा-तफरी मच गई। कुछ जगहों पर कक्षाएं अचानक रोकनी पड़ीं। छात्रों के बीच सबसे बड़ी चिंता यह रही कि उनकी पढ़ाई और आने वाली परीक्षाएं प्रभावित हो सकती हैं। कई छात्र कैमरे के सामने कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। अभिभावक भी परेशान दिखे। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले होनी चाहिए, लेकिन अचानक सीलिंग से पढ़ाई का नुकसान भी हो रहा है।

एक ही रास्ता बना सबसे बड़ा खतरा

स्थानीय लोगों ने इस पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। काकादेव जैसे बड़े कोचिंग इलाके में कई भवन ऐसे हैं जहां एंट्री और एग्जिट के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है, इमरजेंसी निकास की कोई व्यवस्था नहीं और भीड़भाड़ बहुत ज्यादा रहती है। लोगों का कहना है कि अगर किसी दिन आग या कोई अन्य हादसा हो जाए तो छात्रों को बाहर निकालना लगभग नामुमकिन हो जाएगा।

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नियम तोड़ने वालों पर सख्ती

केडीए अधिकारियों ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई सिर्फ शुरुआत है। आने वाले दिनों में पूरे शहर में ऐसे सभी भवनों की जांच की जाएगी जो नियमों के खिलाफ चल रहे हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि फायर सेफ्टी नियम न मानने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी, बिना नक्शा स्वीकृति वाले भवनों को सील किया जाएगा और पार्किंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं होगी।  अधिकारियों के अनुसार, छात्रों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

आगे और भी चल सकता है अभियान

सूत्रों के मुताबिक, यह सिर्फ पहला चरण है। आने वाले समय में कानपुर के अन्य इलाकों में भी निरीक्षण किया जाएगा। विशेषकर उन जगहों पर ध्यान दिया जाएगा जहां कोचिंग संस्थान ज्यादा संख्या में हैं, पुराने और संकरे भवनों में कक्षाएं चल रही हैं और भीड़ अधिक रहती है। 

लखनऊ हादसे के बाद बदला माहौल

लखनऊ में हुए दर्दनाक अग्निकांड के बाद पूरे प्रदेश का प्रशासनिक रवैया बदल गया है। अब हर जिले में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा जांच को प्राथमिकता दी जा रही है। कानपुर की यह कार्रवाई इसी सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो बड़ा खतरा दोबारा सामने आ सकता है।

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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