भोपाल। पूर्व पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री कमलेश्वर पटेल ने पिछले दो वर्षों में ग्रामीण विकास के क्षेत्र में राज्य सरकार को विफल बताया। पटेल ने कहा कि भाजपा सरकार ने ग्रामीण विकास की रीढ़ कही जाने वाली योजनाओं को बर्बाद कर दिया है। मनरेगा योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में पंजीकृत मजदूरों में से एक प्रतिशत मजदूर को भी पूरे 100 दिन का रोजगार नहीं मिल पाया, जो सरकार की गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
पटेल कहा कि आजीविका मिशन के अंतर्गत 2 प्रतिशत महिलाओं को भी रोजगार नहीं मिल पा रहा है। मिशन के माध्यम से शुरू किए गए 6 पोषण आहार संयंत्र भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए, जिसके कारण प्रदेश को भारी नुकसान उठाना पड़ा। परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश आज शिशु मृत्यु दर में देश में पहले स्थान पर और मातृ मृत्यु दर में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंनेक हा कि उनके पंचायत मंत्री रहते हुए महिलाओं को दिए जाने वाले ऋण की ब्याज दर 2 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत की गई थी, जिससे लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहायता मिली थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने ऐसे जनहितकारी प्रयासों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
पटेल ने कहा कि प्रदेश की 23,000 पंचायतों में से मात्र 71 पंचायतों को सांसदों द्वारा गोद लिया गया, लेकिन एक भी पंचायत को आदर्श पंचायत के रूप में विकसित नहीं किया जा सका, जो भाजपा के दावों की पोल खोलता है। आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित एक बगिया मां के नाम योजना में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया कि डिंडोरी जिले में सूखे पौधे वितरित किए गए और लगभग 14 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया। इस घोटाले के खिलाफ आवाज उठाने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष पर एफआईआर दर्ज कर दी गई, जो सच्चाई दबाने का प्रयास है।
पटेल ने कहा कि ग्राम सभाओं को पूरी तरह कमजोर कर दिया गया है। आज पंचायतों में विकास कार्य कराने के लिए जनप्रतिनिधियों को पंचायत मंत्री तक आवेदन करना पड़ता है, जिससे पंचायती राज व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो गया है।