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Ganesh Chaturthi 2025 :कब है गणेश चतुर्थी? पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

कब है गणेश चतुर्थी? पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    सनातन परंपरा में भगवान गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मध्यान्ह के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल भक्त इस दिन बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से घर-आंगन में गणपति की स्थापना करते हैं।

    कब होगा गणेशोत्सव 2025 की शुरुआत?

    गणेशोत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होती है। भक्त इस दौरान 1 दिन, 5 दिन, 7 दिन या पूरे 10 दिन तक गणपति की पूजा करने के बाद विसर्जन करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की मध्यान्ह पूजा का शुभ समय होगा-

    सुबह 11:24 मिनट से दोपहर 01:55 मिनट तक

    इस प्रकार भक्तों को पूजा करने के लिए करीब ढाई घंटे का समय मिलेगा।

    एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 01:54 PM से 08:52 PM, 26 अगस्त (अवधि - 06 घण्टे 58 मिनट्स)

    वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:37 AM से 09:25 PM (अवधि - 11 घण्टे 48 मिनट्स)

    चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 26 अगस्त, 2025 को 01:54 PM बजे

    चतुर्थी तिथि समाप्त - 27 अगस्त, 2025 को 03:44 PM बजे

    गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त

    ब्रह्म मुहूर्त - 04:51 AM से 05:37 AM

    प्रातः सन्ध्या - 05:14 AM से 06:22 AM

    अभिजित मुहूर्त - कोई नहीं

    विजय मुहूर्त - 02:46 PM से 03:36 PM

    गोधूलि मुहूर्त - 06:57 PM से 07:20 PM

    सायाह्न सन्ध्या - 06:57 PM से 08:06 PM

    अमृत काल - 01:37 AM, 28 अगस्त से 03:24 AM, 28 अगस्त

    निशिता मुहूर्त - 12:17 AM, 28 अगस्त से 01:03 AM, 28 अगस्त

    गणपति स्थापना और पूजा विधि

    • गणेश चतुर्थी के दिन स्नान-ध्यान कर व्रत का संकल्प लें।
    • घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में पीला कपड़ा बिछाकर चौकी पर गणेश जी की मूर्ति स्थापित करें।
    • गंगाजल से स्नान कराएं, फिर सिंदूर का तिलक करें।
    • गणपति को दूर्वा, मोदक, मोतीचूर के लड्डू, नारियल, गन्ना आदि अर्पित करें।
    • गणेश चालीसा या गणपति अथर्वशीर्ष का पाठ करें और अंत में शंख, घंटा और मंजीरे के साथ आरती करें।
    • शाम के समय भी यही पूजा विधि दोहराएं और अंत में ब्राह्मण को भोजन व प्रसाद कराकर स्वयं भी ग्रहण करें।

    गणपति विसर्जन 2025

    पूरे 10 दिन तक पूजन-अर्चन के बाद भक्त गाजे-बाजे और उत्सव के साथ गणपति की विदाई करते हैं। पंचांग के अनुसार इस साल गणपति विसर्जन 06 सितंबर 2025, शनिवार को किया जाएगा।

    Shivani Gupta
    By Shivani Gupta

    शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...

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