Garima Vishwakarma
30 Nov 2025
सनातन परंपरा में भगवान गणेश जी की पूजा सबसे पहले की जाती है। उन्हें विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता माना गया है। मान्यता है कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि पर मध्यान्ह के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। इसलिए हर साल भक्त इस दिन बड़ी श्रद्धा और धूमधाम से घर-आंगन में गणपति की स्थापना करते हैं।
गणेशोत्सव की शुरुआत गणेश चतुर्थी से होती है और अनंत चतुर्दशी पर समाप्त होती है। भक्त इस दौरान 1 दिन, 5 दिन, 7 दिन या पूरे 10 दिन तक गणपति की पूजा करने के बाद विसर्जन करते हैं। पंचांग के अनुसार, इस साल गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त 2025, बुधवार को मनाया जाएगा।
गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की मध्यान्ह पूजा का शुभ समय होगा-
सुबह 11:24 मिनट से दोपहर 01:55 मिनट तक
इस प्रकार भक्तों को पूजा करने के लिए करीब ढाई घंटे का समय मिलेगा।
एक दिन पूर्व, वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 01:54 PM से 08:52 PM, 26 अगस्त (अवधि - 06 घण्टे 58 मिनट्स)
वर्जित चन्द्रदर्शन का समय - 09:37 AM से 09:25 PM (अवधि - 11 घण्टे 48 मिनट्स)
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 26 अगस्त, 2025 को 01:54 PM बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - 27 अगस्त, 2025 को 03:44 PM बजे
ब्रह्म मुहूर्त - 04:51 AM से 05:37 AM
प्रातः सन्ध्या - 05:14 AM से 06:22 AM
अभिजित मुहूर्त - कोई नहीं
विजय मुहूर्त - 02:46 PM से 03:36 PM
गोधूलि मुहूर्त - 06:57 PM से 07:20 PM
सायाह्न सन्ध्या - 06:57 PM से 08:06 PM
अमृत काल - 01:37 AM, 28 अगस्त से 03:24 AM, 28 अगस्त
निशिता मुहूर्त - 12:17 AM, 28 अगस्त से 01:03 AM, 28 अगस्त
पूरे 10 दिन तक पूजन-अर्चन के बाद भक्त गाजे-बाजे और उत्सव के साथ गणपति की विदाई करते हैं। पंचांग के अनुसार इस साल गणपति विसर्जन 06 सितंबर 2025, शनिवार को किया जाएगा।