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High Court News : यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के मामले पर जस्टिस अग्रवाल और जस्टिस सिंह की बेंच का सुनवाई से इनकार

यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे को नष्ट करने से जुड़े मामले में दाखिल याचिका पर जस्टिस विवे अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की बेंच ने सुनवाई से इनकार कर दिया। अब इस मामले में एक्टिंग चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच करेगी सुनवाई
यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के मामले पर जस्टिस अग्रवाल और जस्टिस सिंह की बेंच का सुनवाई से इनकार

जबलपुर। भोपाल की यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर के जहरीले कचरे को लेकर वर्ष 2004 में दाखिल  हुई जनहित याचिका पर सोमवार  को जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनीन्द्र कुमार सिंह की बेंच ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। बेंच ने कहा है कि यह मामला एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने सूचीबद्ध किया जाए, क्योंकि जनहित याचिकाओं से संबंधित मामलों का रोस्टर उनके पास है। 

सरकार को पेश करना है ब्यौरा

यह जनहित याचिका भोपाल के आलोक प्रताप सिंह (अब स्वर्गीय) की ओर से वर्ष 2004 में दाखिल करके यूका फैक्ट्री परिसर में मौजूद जहरीले कचरे के विनिष्टीकरण करने के निर्देश दिए जाने की प्रार्थना की गई थी। हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर फैक्ट्री परिसर के जहरीले कचरे को पीथमपुर में जलाकर उसकी राख को जमीन में दबा दिया गया। इस मामले पर सरकार को अगले चरण का ब्यौरा पेश करना है। सोमवार को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता खालिद नूर फखरुद्दीन व राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत रूपराह हाजिर हुए।

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पेंशनर्स के अतिरिक्त इन्क्रीमेंट मामले पर फैसला सुरक्षित रखा

उधर, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा अतिरिक्त इन्क्रीमेंट का भुगतान करने से वंचित किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर मप्र हाईकोर्ट में सोमवार को सुनवाई पूरी हो गई। एक्टिंग चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने मामले पर फैसला सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।

एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट रोका गया, दावा खारिज

पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अमोद सक्सेना की ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में कहा गया है कि मप्र सरकार ने वेतन पुनरीक्षण नियम, 2009 के तहत रोके गए एक अतिरिक्त इंक्रीमेंट संबंधी पेंशनभोगियों के दावे को खारिज कर दिया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सरकारों ने भी अपने कर्मचारियों को अतिरिक्त इंक्रीमेंट की राहत दी जा रही, लेकिन मप्र में इससे पेंशनर्स को वंचित किया जाना अवैधानिक है। 

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एथोनॉल प्लांट के मामले पर फैसला सुरक्षित

वहीं नरसिंहपुर जिले में महाकौशल शुगर मिल के एथोनॉल प्लांट के संचालन को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर एक्टिंग चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। नरसिंहपुर के पत्रकार राहुल कुमार अवधिया की ओर से दाखिल इस याचिका में आरोप है कि मे. महाकौशल शुगर एण्ड पॉवर इंडस्ट्रीज द्वारा ग्राम अगरिया और बचई की 1.446 हेक्टेयर जमीन पर एथोनॉल प्लांट का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा, जिससे स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और फैक्ट्री से निकलने वाले रसायन युक्त पानी से खेतों पर भी बुरा असर पड़ रहा है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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