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इंदौर हाईकोर्ट में याचिका:जूनियर वकीलों को मिले मासिक स्टायपेंड, शहरी में ₹20 हजार और ग्रामीण में ₹15 हजार की मांग

इंदौर में युवा वकीलों को आर्थिक सहारा देने की मांग अब अदालत तक पहुंच गई है। जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम मासिक स्टायपेंड तय करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
जूनियर वकीलों को मिले मासिक स्टायपेंड, शहरी में ₹20 हजार और ग्रामीण में ₹15 हजार की मांग
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर में युवा वकीलों को आर्थिक सहारा देने की मांग अब अदालत तक पहुंच गई है। जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम मासिक स्टायपेंड तय करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। यह याचिका यंग एडवोकेट्स वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव मानवर्धन सिंह तोमर की ओर से लगाई गई है। मामले पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है, जबकि याचिका की पैरवी एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश सिंह भदौरिया करेंगे।

    पहले भी सरकार के सामने उठ चुका है मुद्दा

    एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार जूनियर वकीलों को स्टायपेंड देने की मांग पहले भी राज्य सरकार के सामने रखी जा चुकी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा गया था। उस समय प्रदेश के 12 हजार से ज्यादा अधिवक्ताओं ने इस मांग का समर्थन भी किया था। हालांकि अब तक इस विषय पर कोई ठोस फैसला नहीं होने के कारण एसोसिएशन ने इसे न्यायालय के सामने रखने का निर्णय लिया है। जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब 35 हजार से अधिक युवा अधिवक्ता इस श्रेणी में आते हैं।

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    स्टायपेंड को लेकर रखे गए अहम प्रस्ताव

    याचिका में जूनियर वकीलों के लिए एक व्यवस्थित स्टायपेंड योजना बनाने की मांग की गई है ताकि शुरुआती दौर में उन्हें आर्थिक सहारा मिल सके।मुख्य मांगों में शामिल है कि

    • जूनियर अधिवक्ताओं के लिए न्यूनतम मासिक स्टायपेंड योजना तैयार कर उसे लागू किया जाए।
    • योजना बनाते समय बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा सुझाए गए मानकों को ध्यान में रखा जाए।
    • शहरी क्षेत्रों में जूनियर वकीलों को कम से कम 20 हजार रुपए प्रति माह स्टायपेंड दिया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में यह राशि 15 हजार रुपए प्रति माह तय की जाए।
    • योजना को लागू करने के लिए पात्रता मानदंड, सत्यापन प्रक्रिया और बजट की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

    शुरुआती दौर में आर्थिक परेशानी

    याचिका में यह भी कहा गया है कि अधिवक्ता पेशे की शुरुआत में अधिकतर युवा वकीलों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नियमित आय नहीं होने के कारण कई लोगों के लिए पेशे में टिके रहना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में यदि न्यूनतम स्टायपेंड की व्यवस्था लागू होती है तो युवा अधिवक्ताओं को शुरुआती वर्षों में सहारा मिलेगा और इससे न्याय व्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    Dr. Sumit  Shrivastava
    By Dr. Sumit Shrivastava

    सुमित श्रीवास्तव एक अनुभवी मीडिया प्रोफेशनल, बिजनेस पत्रकार और शोधकर्ता हैं। मास कम्युनिकेशन में M.P...

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