भोजशाला विवाद से जुड़े इस मामले में अब 2 अप्रैल को अगली सुनवाई होगी। उससे पहले हाईकोर्ट के जज खुद स्थल का निरीक्षण करेंगे। एएसआई की रिपोर्ट और विभिन्न पक्षों की आपत्तियों के आधार पर अदालत आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी। यह मामला ऐतिहासिक, धार्मिक और संवैधानिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच ने कहा कि अगली सुनवाई से पहले अदालत स्थल का निरीक्षण करेगी। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली तारीख पर सबसे पहले याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनी जाएंगी, उसके बाद अन्य पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। इस दौरान मुस्लिम पक्ष ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की सर्वे रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज कराई। वहीं अदालत ने यह भी कहा कि मामले में कुछ इंटरविनर (हस्तक्षेप करने वाले पक्ष) शामिल होना चाहते हैं, लेकिन इससे सुनवाई में देरी हो सकती है। इसलिए उन्हें मुख्य पक्षकारों के बाद ही सुना जाएगा।
इस मामले में Archaeological Survey of India की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सुनील जैन अदालत में मौजूद रहे। वहीं राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा। एएसआई ने हाईकोर्ट के आदेश के बाद 22 मार्च 2024 से करीब 100 दिनों तक भोजशाला परिसर और उसके आसपास 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक सर्वे और सीमित उत्खनन किया था। इस टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेख विशेषज्ञ और रसायनविद् शामिल थे। रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के कई शिलालेखों के प्रमाण मिलने की बात कही गई है। इनमें संस्कृत, प्राकृत और नागरी लिपि के साथ अरबी-फारसी में लिखे शिलालेख भी शामिल हैं।
सर्वे रिपोर्ट के अनुसार भोजशाला परिसर में 56 अरबी-फारसी शिलालेख मिले हैं, जिनमें धार्मिक वाक्य, दुआएं और नाम दर्ज हैं। इसके अलावा 12वीं से 16वीं सदी के संस्कृत-प्राकृत शिलालेखों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें साहित्यिक और धार्मिक संदर्भ दिखाई देते हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि यह स्थल अलग-अलग कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होता रहा है। साथ ही ब्रिटिश काल से लेकर अब तक इसके संरक्षण से जुड़े प्रयासों का भी जिक्र किया गया है।