Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

High Court News : दो से ज्यादा संतान पर गई नौकरी, हाईकोर्ट ने किया दखल से इनकार

दो से ज्यादा संतान के कारण सरकारी नौकरी जाने के खिलाफ याचिका दायर करने वाले कर्मचारी को मप्र हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। याचिका दायर करने वाले की रीवा जिला न्यायालय में ड्राइवर के पद पर नियुक्ति हुई थी।
दो से ज्यादा संतान पर गई नौकरी, हाईकोर्ट ने किया दखल से इनकार
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। दो से अधिक संतानों की शर्त के चलते एक कर्मचारी की नौकरी चली गई और करीब 10 साल बाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने पर भी उसे राहत नहीं मिल सकी। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने तीसरी संतान के पिता की बर्खास्तगी को सही ठहराते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।

    दस साल बाद दाखिल की याचिका

    यह मामला रीवा के ग्राम पड़रिया में रहने वाले बृजलाल साकेत की ओर से दाखिल किया गया था। आवेदक का कहना था कि रीवा जिला न्यायालय में ड्राइवर के पद पर उसकी अस्थाई नियुक्ति 20 जनवरी 2015 को हुई थी। 3 दिसंबर 2015 को उसे यह कहते हुए बर्खास्त कर दिया गया कि उसकी तीसरी संतान है। इसके बाद याचिकाकर्ता मजदूरी करने गुजरात के सूरत शहर चला गया। वर्ष 2018 में मप्र हाईकोर्ट द्वारा तीसरी संतान के एक पिता को बहाल करने के संबंध में दिए गए फैसले की जानकारी मिलने पर याचिकाकर्ता ने यह याचिका वर्ष 2025 में दाखिल की।

    याचिकाकर्ता की दलीलें खारिज

    मामले पर हुई सुनवाई के दौरान अनावेदकों की ओर से अधिवक्ता संदीप शुक्ला ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता की ओर से दी गईं दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के नियुक्ति आदेश में स्पष्ट रूप से दो से अधिक संतान वाले पिता पर प्रतिबंध था। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिका दायर करने में लगभग 10 साल की देरी हुई है और इस दौरान संबंधित पद भी भरा जा चुका होगा। इन सभी तथ्यों को देखते हुए बेंच ने याचिका को खारिज कर दिया।

    Featured News

    ‘शादी के बाद पिता की हैसियत का फायदा नहीं ले सकती बेटी’ 

    एक अन्य अहम फैसले में मप्र हाईकोर्ट ने कहा है कि शादी के बाद कोई भी बेटी अपने पिता की हैसियत का फायदा नहीं ले सकती है। यह फायदा तभी मिल सकता है, जब तक कि बेटी यह साबित न करे कि वह पति से अलग रह रही है या उसे भरण-पोषण नहीं मिल रहा। इन आधारों के साथ जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने पिता के बीपीएल कार्ड के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति पाने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी और उसकी नियुक्ति रद्द करने के फैसलों को सही ठहराया।

    कलेक्टर ने नियुक्ति अवैध बताई, कमिश्नर ने सही

    हाईकोर्ट ने यह फैसला रीवा जिले की जनपद पंचायत जवा के ग्राम सितलहा में रहने वाली रूबी विश्वकर्मा की याचिका पर दिया। दरअसल, रूबी की नियुक्ति आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के रूप में 18 सितंबर 2017 को हुई थी। इस बारे में की गई शिकायत पर एडिशनल कलेक्टर ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति अवैध ठहराई थी। इस फैसले को एडिशनल कमिश्नर द्वारा भी सही ठहराए जाने पर यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।

    शादी के चार साल बाद अनुचित लाभ

    मामले पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता मुकेश शुक्ला और शिकायतकर्ता देशरानी वर्मा की ओर से अधिवक्ता हिमान्शु शुक्ला ने दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता ने शादी के 4 साल बाद अपने पिता के बीपीएल कार्ड के आधार पर यह अनुचित लाभ, जो गलत है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

    Latest Posts