
नौकरीपेशा लोगों के लिए टैक्स से जुड़ी एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अक्सर ऐसा होता है कि कंपनी सैलरी से TDS तो काट लेती है, लेकिन उसे सरकार के खाते में जमा नहीं करती। बाद में जब कर्मचारी अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरता है, तो उसे नोटिस मिल जाता है कि टैक्स दोबारा जमा करें। अब इस पूरे विवाद पर इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने साफ और कड़ा फैसला दिया है, जिससे लाखों कर्मचारियों को राहत मिल सकती है।
यह मामला असेसमेंट ईयर 2016-17 से जुड़ा है। दीपक कुमार रुइया नाम के कर्मचारी ‘फाल्कन टायर्स प्राइवेट लिमिटेड’ में काम करते थे। कंपनी ने उनकी सैलरी से करीब 17.97 लाख रुपये TDS के रूप में काटे थे। नियम के मुताबिक यह रकम सरकार के खाते में जमा होनी चाहिए थी, लेकिन कंपनी ने ऐसा नहीं किया। बाद में कंपनी आर्थिक संकट में फंस गई और दिवालिया हो गई। जब दीपक कुमार रुइया ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न भरा और TDS का क्रेडिट मांगा, तो इनकम टैक्स विभाग ने इसे मानने से इनकार कर दिया।
टैक्स विभाग के असेसिंग ऑफिसर (AO) ने कहा कि चूंकि कंपनी ने TDS जमा नहीं किया, इसलिए कर्मचारी को इसका लाभ नहीं मिल सकता। इसके चलते दीपक कुमार रुइया पर करीब 15.85 लाख रुपये की टैक्स डिमांड निकाल दी गई। यानी जो पैसा उनकी सैलरी से पहले ही कट चुका था, वही टैक्स उनसे दोबारा मांगा जा रहा था। यह स्थिति किसी भी कर्मचारी के लिए बेहद परेशान करने वाली हो सकती है।
जब यह मामला ITAT की कोलकाता बेंच में पहुंचा, तो ट्रिब्यूनल ने टैक्स विभाग के रवैये पर सख्त टिप्पणी की। ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि कर्मचारी की जिम्मेदारी सिर्फ इतनी होती है कि उसकी सैलरी से टैक्स कटे। अगर कंपनी ने TDS काट लिया है, तो इसके बाद उसे सरकार के खाते में जमा करना पूरी तरह से नियोक्ता (एम्प्लॉयर) की जिम्मेदारी है। ITAT ने अपने फैसले में कहा कि अगर एम्प्लॉयर टैक्स जमा करने में चूक करता है, तो इसकी सजा कर्मचारी को नहीं दी जा सकती।
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने साल 2016 में ही एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें साफ लिखा गया है कि अगर TDS कट चुका है, तो टैक्स विभाग सीधे कर्मचारी से उसकी वसूली नहीं कर सकता, भले ही कंपनी ने वह पैसा जमा न किया हो।
ITAT ने दीपक कुमार रुइया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके ऊपर डाली गई पूरी टैक्स डिमांड को खारिज कर दिया। साथ ही आदेश दिया कि उन्हें पूरा TDS क्रेडिट दिया जाए। ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि अगर कोई बकाया है, तो उसकी वसूली कंपनी से की जानी चाहिए, न कि कर्मचारी से।