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Peoples Update Special :पांच साल में वायु प्रदूषण कम करने में जबलपुर और भोपाल सबसे आगे

पांच वर्ष में शहरों के वायु प्रदूषण की स्थिति में नियंत्रण हुआ है। वायु प्रदूषण नियंत्रण करने में जबलपुर शहर सबसे आगे रहा है। इसके बाद भोपाल ने अच्छा काम किया है। प्रदेश में वायु प्रदूषण कम करने के लिए 378 करोड़ का प्लान बनाया गया है।
पांच साल में वायु प्रदूषण कम करने में जबलपुर और भोपाल सबसे आगे
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    अशोक गौतम, भोपाल। प्रदेश में एक्यूआई बढ़ने को लेकर पिछले 3-4 माह से भले ही कोहराम मचा हो, लेकिन पांच वर्ष में शहरों के वायु प्रदूषण की स्थिति में नियंत्रण हुआ है। वायु प्रदूषण नियंत्रण करने में जबलपुर, भोपाल शहर आगे रहा है। वहीं, सागर जिले में इस दौरान वायु प्रदूषण की मात्रा 13 (पार्टिकुलेटेड मैटर) पीएम-10 बढ़ा है। भारत सरकार ने वर्ष 2019-20 में देशभर के सबसे ज्यादा वायु प्रदूषित शहरों को चिन्हित किया था। 

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    केंद्र ने शहरों से मांगा प्रदूषण कम करने का प्लान

    राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तरह केंद्र सरकार ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, सागर, उज्जैन और देवास नगर निगमों (नॉन अटेनमेंट सिटी ) को वर्ष 2020 की अपेक्षा वायु प्रदूषण कम करने के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जाएंगे । इन शहरों से वायु प्रदूषण कम करने के लिए प्लान मांगा गया है। निकायों को अब तक 184 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं। 194 करोड़ और जारी किए जाएंगे।

    वायु प्रदूषण की बड़ी वजह

    प्रदूषण बढ़ने की बड़ी वजह कचरे में आग, निर्माण कार्य और पुराने वाहनों का संचालन और सड़कों पर धूल जमा होना है। इसके लिए निकाय अपने स्तर पर प्रभावी नियंत्रण कर वायु प्रदूषण का कम करने का प्रयास कर रहे हैं।

    यह किए गए उपाय

    निकायों को झाड़ू लगाने वाली मशीनें खरीदने, शाम को सड़कों पर जल छिड़काव और कचरा वाहन खरीदने सहित वाहन खरीदने के लिए राशि का उपयोग किया गया। कचरे में आग लगाने पर नियंत्रण की मॉनिटरिंग की जा रही है।

    2026 तक के लिए बढ़ा दी योजना

    सरकार ने निकायों को यह आजादी दी है कि वे अपने अनुसार अनुदान की राशि खर्च कर सकते हैं, लेकिन प्रदूषण कम करना जरूरी है। अगर वायु प्रदूषण कम नहीं होता है तो इनकी अनुदान की किस्त रोक दी जाएगी। बताया जाता है कि यह कार्यक्रम केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने वर्ष 2024 तक चलाया था, लेकिन हाल ही में इसकी तारीख 2026 तक के लिए बढ़ा दी है। अब इन निकायों को वायु की गुणवत्ता सुधार की कार्ययोजना बनाने और उसे लागू करने में दो वर्ष का और समय मिल गया है।

    18 विभाग मिलकर करेंगे काम

    लोक निर्माण, पर्यावरण, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग, वन, परिवहन विभाग, गृह, सहित कई विभाग वायु की गुणवत्ता सुधार के लिए काम करेंगे और इसकी रिपोर्ट पर्यावरण मंत्रालय को देंगे। प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच पड़ताल के लिए ड्राइव चलाया जाएगा। वहीं कचरे में आग लगाने पर भी नियंत्रण करने के साथ ही इसे पूरी तरह से रोका जाएगा।

    सफाईकर्मियों को ट्रेनिंग

    सड़कों में झाड़ू लगाने वालों और सफाई कर्मियों को ट्रेनिंग दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि वे किस तरह से झाड़ू लगाएं। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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