वरुण कुमार चौहान, श्री विजयनगर, अंडमान। तमिलनाडु और केरल को भारत के प्रमुख मसाला उत्पादक राज्यों के लिए जाना जाता है, लेकिन अब इसमें नया नाम अंडमान द्वीप समूह भी जुड़ गया है। अंडमान के घने जंगलों में दुर्लभ और औषधीय मसाले की प्रजाति ‘वूडी पेपर’ प्राकृतिक रूप से पाई गई है। यह मसाला अब तक थाईलैंड और वियतनाम जैसे देशों तक सीमित माना जाता था। भारत में इसकी मौजूदगी पहली बार आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है।
CIARI के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अजित अरुण वामन और डॉ. पूजा बोहरा द्वारा किए गए शोध में इस मसाले के असाधारण जैव-रासायनिक गुण सामने आए हैं। डॉ. वामन के अनुसार, वूडी पेपर में पाइपरिन नाम का रसायन मिला है। पाइपरिन वही तत्व है, जो काली मिर्च में तीखापन देता है और शरीर में दवाओं व पोषक तत्वों की अवशोषण क्षमता बढ़ाता है। शोध के अनुसार, ‘वैक्यूम ड्राइंग’ विधि से सुखाने पर इसके तने में 7.665 मिलीग्राम प्रति ग्राम तक पाइपरिन सुरक्षित रहता है।
18 जून 2024 को प्रकाशित शोध के अनुसार, अधिकांश मसालों में बीज या फल का उपयोग होता है, लेकिन वूडी पेपर की पहचान इसका तना है। वैज्ञानिकों के अनुसार, तने की मोटाई जितनी अधिक होती है, उसमें तीखापन और औषधीय गुण उतने ही ज्यादा होते हैं।
फेनोलिक प्रोफाइलिंग में वूडी पेपर में 18 प्रकार के औषधीय यौगिक पाए गए हैं। इनमें फेरुलिक एसिड प्रमुख है, जो एक शक्तिशाली एंटी ऑक्सीडेंट माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज भारत के तटीय इलाकों के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है और अंडमान के किसानों की आय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभा सकती है।
डॉ. डॉ. अजित अरुण वामन के अनुसार, इसकी खेती बहुत कम होती थी, इसलिए हम द्वीप के किसानों को रोपण सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं, ताकि उत्पादन बढ़ाया जा सके। भविष्य की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए हमने दो मूल्यवर्धित उत्पाद विकसित किए हैं। एक भीगा हुआ संरक्षित उत्पाद और दूसरा निर्जलित (सूखा) पाउडर। ताजे उत्पादों की तुलना में इन दोनों की सेल्फ लाइफ एक वर्ष है, जबकि ताजे उत्पादों की शेल्फ लाइफ 4 से 5 दिन होती है।