आशीष शर्मा, ग्वालियर। ऑस्ट्रेलिया सहित ठंडी जलवायु में उगने वाले ब्लूबेरी को ग्वालियर के गर्म तापमान में उगाने में राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को सफलता मिली है। इससे भविष्य में मप्र और इसी जैसे गर्म जलवायु वाले प्रदेशों में इसकी खेती बड़े पैमाने पर होने की उम्मीद जगी है।
विवि के कुलपति प्रो. अरविंद कुमार शुक्ला ने बताया कि ब्लूबेरी के 150 पेड़ों से कटिंग के जरिए 450 पौधे भी तैयार किए गए हैं, जिन्हें कोल्ड स्टोरेज में रखा गया है। नवंबर-दिसंबर में ये पौधे लगाए जाएंगे। ऑस्ट्रेलिया से जब पौधे मंगाकर रोपे गए, तो कुछ समय बाद सूखने लगे थे, क्योंकि यहां का मौसम इनके लिए अनुकूल नहीं था। ऐसे में मिट्टी का पीएच लेवल 4.2 से 4.5 रखा गया, हर दिन 4-5 बार पानी दिया गया और सबसे जरूरी चीज इन्हें जिंदा रखने के लिए पोषक तत्व दिए गए।

ब्लूबेरी एक अत्यधिक पौष्टिक और एंटी ऑक्सीडेंट (एंथोसायनिन) से भरपूर सुपरफूड है। हृदय स्वास्थ्य, मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली और बेहतर दिमागी कार्यक्षमता के लिए इसका सेवन अच्छा माना जाता है। यह कम कैलोरी (1 कप में लगभग 80) और उच्च फाइबर वाला फल है, जो मधुमेह नियंत्रण, कैंसर की रोकथाम और आंखों की रोशनी के लिए बेहद फायदेमंद है।
ब्लूबेरी ऑस्ट्रेलिया का मुख्य फल है। ग्वालियर का तापमान काफी गर्म रहता है, इसलिए पौधों को जिंदा रखने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। अब फूल और फल आना शुरू हो गए हैं। जिस तकनीक से ब्लूबेरी के पौधों को जिंदा रखकर उनमें फल उगाए हैं, उसे पेटेंट कराने जा रहे हैं।
डॉ. सुषमा तिवारी, वरिष्ठ वैज्ञानिक कृषि विवि ग्वालियर