नई दिल्ली/पठानकोट। भारत में व्हाइट-कॉलर आतंकवाद के बाद अब एक नई और गंभीर सुरक्षा चुनौती सामने आई है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, नाबालिगों के जरिए जासूसी नेटवर्क खड़ा करने की कोशिश की जा रही है, इस साजिश के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) का हाथ बताया जा रहा है।
आरोप है कि आईएसआई नाबालिगों को अपने जाल में फंसाकर उनका ब्रेनवॉश कर रही है और फिर उन्हें भारत के खिलाफ जासूसी गतिविधियों में इस्तेमाल किया जा रहा है। यह तरीका बेहद खतरनाक माना जा रहा है, क्योंकि इसमें कम उम्र के बच्चों को निशाना बनाया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि फिलहाल 37 से ज्यादा नाबालिग सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में हैं।
इनमें पंजाब और हरियाणा के 12, जबकि जम्मू-कश्मीर के करीब 25 नाबालिग शामिल हैं। इन सभी की उम्र 14 से 17 साल के बीच बताई जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और ऐसे प्रयासों को समय रहते नाकाम करने की कोशिश में जुटी हैं।
ISI के इस जासूसी नेटवर्क का खुलासा तब हुआ, जब जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले में एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़के को हिरासत में लिया गया। खुफिया इनपुट के आधार पर जांच में सामने आया कि वह पाकिस्तान स्थित एजेंसियों और उनके हैंडलरों के संपर्क में था। पुलिस ने जब उसके मोबाइल फोन की जांच की, तो कई चौंकाने वाले सबूत मिले। मोबाइल में ऐसे कंटेंट पाए गए, जो सीधे तौर पर जासूसी गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं।
ISI के इस नए ऑपरेशन पर पठानकोर्ट के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने ANI से बातचीत में बताया कि नाबालिग का संपर्क आतंकी संगठनों के फ्रंटल संस्थानों, आईएसआई से जुड़े एजेंटों और उनके हैंडलरों से था। एसएसपी ढिल्लों के अनुसार, पाकिस्तानी एजेंसियों ने नाबालिग को फंसाकर उसका ब्रेनवॉश किया और उनके निर्देश पर वह भारतीय सुरक्षा बलों के संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें और वीडियो बना रहा था।सुरक्षा एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इसमें और कितने लोग शामिल हैं।