Irrfan Khan Death Anniversary :दर्द से भरी चिट्ठी, सुतापा के लिए रूहानी इश्क… और चोट के बावजूद शूटिंग का जुनून - ऐसे थे इरफान खान

29 अप्रैल 2020… ये सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि करोड़ों दिलों के लिए एक ऐसा जख्म है जो आज भी ताजा है। इरफान खान- एक नाम नहीं, बल्कि सादगी, गहराई और सच्चाई का दूसरा नाम। उनके जाने के 6 साल बाद भी ऐसा लगता है जैसे वो कहीं गए ही नहीं… बस नजरों से ओझल हो गए हैं। उनकी आंखों की खामोशी, आवाज की सादगी और किरदारों की सच्चाई आज भी लोगों के दिलों में उसी तरह बसती है। इरफान सिर्फ अभिनेता नहीं थे, वो जिंदगी को देखने का एक नजरिया थे।
जब दर्द को शब्दों में ढाला…
इरफान खान का लंदन से लिखा गया खत आज भी लोगों की आंखें नम कर देता है। जब उन्होंने अपनी बीमारी न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर के बारे में बताया, तो उनके शब्दों में दर्द के साथ-साथ एक अजीब सी सच्चाई भी थी। उन्होंने जिंदगी को एक सफर बताया, जहां अचानक किसी मोड़ पर आपको उतरने के लिए कहा जाता है, भले ही वो आपकी मंजिल न हो।

उनका यह एहसास – ‘दर्द खुदा से भी बड़ा महसूस हुआ’ - हर उस इंसान के दिल तक पहुंचता है, जिसने कभी असहायता महसूस की हो। लेकिन इसी दर्द के बीच उन्होंने एक गहरी बात भी समझी – ‘केवल अनिश्चितता ही निश्चित है।’ यही सोच उन्हें डर से निकालकर एक अलग ही शांति की ओर ले गई।
प्यार की कहानी - थिएटर से शादी तक
इरफान और उनकी पत्नी सुतापा सिकदर की लव स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं थी। दोनों की मुलाकात दिल्ली के नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में हुई थी। दोस्ती हुई, बातचीत बढ़ी और फिर वही दोस्ती प्यार में बदल गई। दोनों ने लंबे समय तक साथ रहकर अपने रिश्ते को समझा। आखिरकार 23 फरवरी 1995 को दोनों ने शादी कर ली। इरफान का प्यार इतना सच्चा था कि वो सुतापा के लिए धर्म बदलने तक को तैयार थे। हालांकि, सुतापा के परिवार ने उन्हें वैसे ही अपना लिया। दोनों के दो बेटे हुए- जिनमें से बाबिल आज अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।

संघर्ष से शिखर तक का सफर
इरफान खान का करियर किसी शॉर्टकट का नतीजा नहीं था। उन्होंने सालों तक छोटे-छोटे रोल किए, रिजेक्शन झेले और खुद को साबित किया। उनकी खास बात यह थी कि वो कभी स्टारडम के पीछे नहीं भागे। उन्होंने अपने काम को समय दिया, उसे निखारा और हर किरदार में सच्चाई डाली। इसलिए जब वो स्क्रीन पर आते थे, तो एक्टिंग नहीं करते थे बल्कि वो उस किरदार को जीते थे।

‘पान सिंह तोमर’ के लिए समर्पण
फिल्म पान सिंह तोमर के दौरान इरफान का समर्पण देखने लायक था। शूटिंग के दौरान उन्हें एड़ी में गंभीर चोट लगी, लेकिन उन्होंने काम नहीं रोका। दर्द में भी वो सेट पर आते, पेनकिलर लेकर दौड़ते और कैमरा ऑन होते ही किरदार में खो जाते। यही वजह थी कि उनकी एक्टिंग इतनी असली लगती थी-क्योंकि उसमें कोई बनावट नहीं थी। इसी फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला, जो उनका पहला और इकलौता राष्ट्रीय सम्मान था।

छोटी-छोटी चीजों में खुशी ढूंढने वाला इंसान
इरफान जितने बड़े कलाकार थे, उतने ही सरल इंसान भी थे। सेट पर वो हर किसी से घुल-मिल जाते थे, चाहे टेक्नीशियन हो या जूनियर आर्टिस्ट। उनका सेंस ऑफ ह्यूमर माहौल को हल्का बना देता था। एक किस्सा बेहद खास है- शूटिंग के दौरान वो एक बकरी के बच्चे के साथ खेलते नजर आए। ये कोई दिखावा नहीं था, बल्कि उनका असली स्वभाव था। उनके लिए जिंदगी का मतलब था- हर छोटे पल में खुशी ढूंढना।

हर किरदार में सच्चाई, हर पल में सीख
इरफान खान की एक्टिंग का तरीका अलग था। वो किरदार को समझते थे, उसे महसूस करते थे और फिर उसमें उतर जाते थे। उनके अंदर सीखने की भूख हमेशा जिंदा रहती थी। वो हर चीज के बारे में जानना चाहते थे- चाहे वो किताब हो, जगह हो या कोई इंसान। जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने रिजेक्शन को कैसे संभाला, तो उनका जवाब था- ‘मैं रिजेक्शन हैंडल नहीं करता।’ मतलब साफ था कि वो उसे अपनी पहचान नहीं बनने देते थे।
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A Story That Refused to Die : इरफान की सोच का आईना
रंजीता कौर की डॉक्यूमेंट्री ‘A Story That Refused to Die’ इरफान की जिंदगी और फिल्म पान सिंह तोमर की जर्नी को दिखाती है। इसका टाइटल भी इरफान के ही शब्दों से प्रेरित है – ‘यह कहानी मरने को तैयार नहीं थी।’ आज इसकी स्क्रीनिंग मुंबई के नीता मुकेश अंबानी कल्चरल सेंटर में हो रही है। यह डॉक्यूमेंट्री सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि इरफान की सोच, संघर्ष और जुनून की झलक है।

एक कलाकार नहीं, एक एहसास
इरफान खान को समझने के लिए सिनेमा का एक्सपर्ट होना जरूरी नहीं। वो हर उस इंसान के दिल में बसते हैं, जिसने सच्चाई को महसूस किया है। उनकी जिंदगी एक सीख देती है- अगर आप किसी चीज को सच्चे दिल से करते हैं, तो वो कभी खत्म नहीं होती।
आज भी जिंदा हैं इरफान…
इरफान खान आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम, उनकी सोच और उनकी सादगी आज भी जिंदा है। उनकी कहानी सच में ‘मरने से इनकार करती है’ क्योंकि कुछ लोग कभी जाते नहीं… वो बस यादों में बस जाते हैं।











