ईरान-अमेरिका टकराव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर संकट,ट्रंप ने देशों से मांगे युद्धपोत

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा। तेल की कीमतें उछलीं, ट्रंप ने रास्ता खोलने के लिए कई देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की।
Follow on Google News
ट्रंप ने देशों से मांगे युद्धपोत
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच दुनिया की नजर एक बार फिर Strait of Hormuz पर टिक गई है। यह समुद्री रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति का सबसे अहम मार्ग माना जाता है। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के कारण यहां हालात काफी तनावपूर्ण हो गए हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि दुनिया के कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडराने लगा है। इसी कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका हर हाल में इस समुद्री मार्ग को खुला रखेगा।

    तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी

    मौजूदा तनाव का असर सीधे तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। युद्ध से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगभग 68 से 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था। लेकिन हालात बिगड़ने के बाद इसकी कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक जारी रही तो कई देशों में ईंधन संकट पैदा हो सकता है। तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन सकती हैं।

    ये भी पढ़ें: दारोगा भर्ती परीक्षा में पंडित शब्द पर विवाद : डिप्टी सीएम नाराज, सीएम योगी ने भर्ती बोर्डों को दिए सख्त निर्देश

    सोशल मीडिया पर ट्रंप ने कहा

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि कई देश मिलकर होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित बनाने के लिए कदम उठाएंगे। उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्रिटेन जैसे देशों से इस क्षेत्र में युद्धपोत भेजने की अपील की है। ट्रंप का कहना है कि अगर दुनिया के प्रभावित देश मिलकर काम करें तो इस समुद्री मार्ग को सुरक्षित रखा जा सकता है। उनका दावा है कि अमेरिका ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर चुका है, लेकिन छोटे हमलों के जरिए समुद्री रास्तों को बाधित करना अभी भी संभव है।

    ईरान की प्रतिक्रिया

    ईरान ने इन आरोपों को अलग तरह से देखा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का कहना है कि होर्मुज़ स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उनके मुताबिक यह रास्ता केवल उन देशों के जहाजों के लिए रोका गया है जिन्हें ईरान अपना दुश्मन मानता है। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह अमेरिका और उसके सहयोगी देशों से जुड़े ऊर्जा केंद्रों को निशाना बना सकता है।

    जहाजों पर हमलों से बढ़ी चिंता

    संघर्ष शुरू होने के बाद इस क्षेत्र में कई जहाजों पर हमले की खबरें सामने आई हैं। इसी वजह से कई तेल टैंकर अब इस रास्ते से गुजरने में हिचकिचा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह समुद्री रास्ता काफी संकरा है। इसलिए यहां ड्रोन, मिसाइल या समुद्री बारूदी सुरंग के जरिए हमला करना आसान हो सकता है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने हाल ही में ईरान के उन जहाजों को नष्ट किया जो समुद्र में बारूदी सुरंग बिछाने की कोशिश कर रहे थे।

    दूसरे देशों की क्या प्रतिक्रिया है

    फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने कहा है कि उनका देश खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने पर विचार कर सकता है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि यह कदम तब उठाया जाएगा जब हालात कुछ स्थिर होंगे। ब्रिटेन की नौसेना भी इस क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। लेकिन अभी तक बड़े स्तर पर सैन्य तैनाती नहीं की गई है।

    भारत पर भी असर

    होर्मुज स्ट्रेट से भारत समेत कई एशियाई देशों को तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इसलिए यहां किसी भी तरह की रुकावट का असर भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ सकता है। हाल ही में भारत सरकार ने बताया कि एलपीजी लेकर दो जहाज इस रास्ते से गुजरकर भारत पहुंचने वाले हैं। इससे फिलहाल राहत की खबर मिली है, लेकिन स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

    क्यों इतना महत्वपूर्ण है होर्मुज स्ट्रेट

    Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत समुद्री तेल व्यापार का परिवहन इसी रास्ते से होता है। हर साल हजारों जहाज इस मार्ग से गुजरते हैं। ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार 2025 में हर दिन करीब 2 करोड़ बैरल तेल इस रास्ते से होकर गुजरा था। इसका कुल व्यापार मूल्य सैकड़ों अरब डॉलर तक पहुंचता है।

    एशियाई देशों की बड़ी निर्भरता

    इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाला अधिकतर तेल एशियाई देशों को जाता है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसियों के अनुसार लगभग 80 प्रतिशत तेल एशिया की ओर भेजा जाता है। इसका मतलब है कि अगर यह रास्ता बंद हो जाए तो चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।

    Sona Rajput
    By Sona Rajput

    माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

    नई दिल्ली
    --°
    बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
    Source:AccuWeather
    icon

    Latest Posts