ट्रंप का जर्मनी पर डबल वार:हजारों सैनिकों की वापसी का ऐलान, यूरोपीय संघ की कारों पर 25% टैरिफ

ट्रंप ने सैनिकों की संख्या 5 हजार से भी ज्यादा घटाने के संकेत दिए हैं। यूरोपीय यूनियन की गाड़ियों पर 25% टैक्स लगाने का फैसला लिया गया है। इस कदम का सबसे ज्यादा असर जर्मनी की ऑटो इंडस्ट्री पर पड़ सकता है। अमेरिका और यूरोप दोनों जगह इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है।
अमेरिका 5 हजार सैनिकों को वापस बुलाएगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने साफ किया कि जर्मनी में तैनात अमेरिकी सैनिकों की संख्या में सिर्फ 5 हजार की कटौती नहीं होगी, बल्कि इससे कहीं ज्यादा सैनिक वापस बुलाए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया एक बड़े बदलाव की शुरुआत है। ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी रक्षा नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पहले जहां सीमित कटौती की बात हो रही थी, अब व्यापक स्तर पर सैन्य बल घटाने की चर्चा है। इससे यूरोप में अमेरिका की रणनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।
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यूरोपीय यूनियन के वाहनों पर 25% टैरिफ का ऐलान
ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय यूनियन की कारों और ट्रकों पर 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो अगले सप्ताह से लागू हो सकता है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर जर्मनी पर पड़ने की संभावना है, क्योंकि वह ऑटोमोबाइल निर्माण का प्रमुख केंद्र है। ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ ने व्यापारिक समझौतों का सही पालन नहीं किया। इस टैरिफ से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में असंतुलन बढ़ सकता है और दोनों पक्षों के बीच आर्थिक तनाव गहरा सकता है।
अमेरिका के भीतर भी उठे सवाल
ट्रंप के इस फैसले का विरोध अमेरिका के भीतर भी शुरू हो गया है। कई नेताओं और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जर्मनी से सैनिकों की वापसी से रूस को फायदा मिल सकता है। खासतौर पर व्लादिमीर पुतिन को लेकर यह चिंता जताई जा रही है कि यूरोप में शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है। यूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच यह कदम और भी संवेदनशील माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है।
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जर्मनी के रक्षा मंत्री ने दी प्रतिक्रिया
जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ट्रंप पहले भी ऐसे संकेत देते रहे हैं, इसलिए यह पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप को अपनी सुरक्षा के लिए खुद आगे आना होगा। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि जर्मनी में अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी दोनों देशों के हित में है। उनका बयान संतुलित कूटनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ सैन्य या व्यापारिक नहीं, बल्कि एक बड़ा रणनीतिक संदेश भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जर्मनी में फिलहाल करीब 36 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जिनकी वापसी 6 से 12 महीनों में पूरी हो सकती है।












