स्पोर्ट्स डेस्क। जिम्बाब्वे के तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजरबानी पर पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) ने बड़ा एक्शन लेते हुए 2 साल का बैन लगा दिया है। यह फैसला तब आया जब खिलाड़ी ने PSL फ्रेंचाइजी से करार होने के बावजूद इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने का विकल्प चुना। मुजरबानी को PSL टीम इस्लामाबाद यूनाइटेड ने रिप्लेसमेंट प्लेयर के तौर पर साइन किया था। लेकिन बाद में उन्हें कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) से ऑफर मिला, जिसके बाद उन्होंने PSL से अपना नाम वापस ले लिया।
PSL प्रशासन ने अपने बयान में कहा कि फ्रेंचाइजी क्रिकेट में पारदर्शिता और प्रोफेशनलिज्म बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर कोई खिलाड़ी पहले से किसी टीम के साथ करार में है, तो उसे दूसरी लीग से जुड़ने की अनुमति नहीं होती।
लीग का मानना है कि ऐसे मामलों को नजरअंदाज करने से फ्रेंचाइजी और अन्य हितधारकों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है। यही वजह है कि मुजरबानी पर दो साल का प्रतिबंध लगाया गया है।
मुजरबानी ने IPL में अब तक 2 मुकाबले खेले हैं और अपने प्रदर्शन से प्रभावित किया है। उन्होंने ईडन गार्डन्स में सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 4 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया। इससे पहले भी वह अंतरराष्ट्रीय मंच पर खासकर टी20 वर्ल्ड कप में अपने प्रदर्शन से पहचान बना चुके हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घातक गेंदबाजी के दम पर कंगारु टीम उनके सामने पत्तों की तरह बिखर गई थी।
यह पहली बार नहीं है जब किसी खिलाड़ी को लीग एग्रीमेंट तोड़ने पर सजा मिली हो। पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश को भी इसी तरह के मामले में एक साल के लिए PSL से बैन किया गया था।
बॉश ने पेशावर जालमी के साथ करार किया था, लेकिन बाद में वह मुंबई इंडियंस से जुड़ गए थे। बाद में उन्होंने माफी मांगी और बोर्ड ने उनसे हर्जाना भी मांगा था।
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मुजरबानी को KKR ने बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान के रिप्लेसमेंट के रूप में टीम में शामिल किया था। रहमान को BCCI के निर्देश के बाद रिलीज किया गया था, जिसके बाद KKR ने मुजरबानी को मौका दिया।
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ऐसा ही मामला पहले भी सामने आ चुका है, जब श्रीलंका के कुसल मेंडिस और ऑस्ट्रेलिया के मिचेल ओवन ने PSL में खेलने के बाद IPL का रुख किया था।भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण लीग कुछ समय के लिए रुकी थी, जिसके बाद इन खिलाड़ियों ने IPL में खेलने का फैसला किया। कुल मिलाकर, यह मामला फ्रेंचाइजी क्रिकेट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कॉन्ट्रैक्ट नियमों की अहमियत को दिखाता है। अब देखना होगा कि इस फैसले का भविष्य में खिलाड़ियों के फैसलों पर क्या असर पड़ता है।