नई दिल्ली/कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक बड़ी कार्रवाई ने सियासी माहौल गरमा दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के डायरेक्टर और को-फाउंडर विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है। यह गिरफ्तारी कोयला घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई है।
चूंकि I-PAC, ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनावी रणनीति तैयार करता है, इसलिए इस कार्रवाई के राजनीतिक मायने और भी बढ़ गए हैं। चुनाव से ठीक पहले हुई इस गिरफ्तारी ने निष्पक्षता और एजेंसियों की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
ED के अनुसार, यह मामला पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित कोयला तस्करी घोटाले से जुड़ा है। इस घोटाले में करोड़ों रुपये की अवैध कमाई को हवाला के जरिए अलग-अलग संस्थाओं तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इसी नेटवर्क के जरिए करीब 20 करोड़ रुपये I-PAC की कंपनी तक पहुंचे।
यह पूरा केस नवंबर 2020 में दर्ज CBI की FIR से जुड़ा है, जिसमें आसनसोल और आसपास के इलाकों में कोयला चोरी और तस्करी का आरोप लगाया गया था। बाद में ED ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों में से एक हैं और इस पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म के को-फाउंडर हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर इस कंपनी की शुरुआत की थी। I-PAC देश की बड़ी राजनीतिक कंसल्टेंसी कंपनियों में शामिल है, जो चुनावी रणनीति, कैंपेन मैनेजमेंट और डेटा एनालिसिस का काम करती है। पश्चिम बंगाल में TMC के चुनाव अभियान में चंदेल की भूमिका काफी अहम मानी जाती है।
[breaking type="Breaking"]
यह गिरफ्तारी ऐसे समय पर हुई है जब पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनाव से महज 10 दिन पहले I-PAC के बड़े अधिकारी की गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। TMC का आरोप है कि, यह कार्रवाई जानबूझकर चुनाव से पहले की गई ताकि पार्टी की रणनीति को प्रभावित किया जा सके। वहीं ED का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह जांच के आधार पर की गई है।
TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने इस कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले ED, CBI और NIA जैसी एजेंसियों की कार्रवाई से डर का माहौल बनता है, जो निष्पक्ष चुनाव के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि, जिन नेताओं पर गंभीर आरोप होते हैं, वे पार्टी बदलते ही सुरक्षित हो जाते हैं, जबकि विपक्ष को निशाना बनाया जाता है। उनका कहना है कि, बंगाल न डरेगा, न झुकेगा और इस दबाव का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।
इस मामले में ED पहले भी कई बार कार्रवाई कर चुकी है। 2 अप्रैल को एजेंसी ने दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।
मुख्य कार्रवाई-
दिल्ली: विनेश चंदेल के ठिकाने
बेंगलुरु: ऋषिराज सिंह का परिसर
मुंबई: आम आदमी पार्टी के पूर्व नेता विजय नायर का ठिकाना
इसके अलावा 8 जनवरी को कोलकाता में I-PAC ऑफिस और डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर भी छापा मारा गया था।
[tag id="67615" type="West Bengal Election 2026" slug="west-bengal-election-2026"]
जनवरी में हुई छापेमारी के दौरान एक बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद I-PAC ऑफिस पहुंच गईं। बताया गया कि, वह वहां से कुछ फाइलें लेकर बाहर निकलीं, जिस पर ED ने आपत्ति जताई। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इससे जांच में बाधा आई, जबकि TMC का कहना था कि यह पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज थे।
यह मामला करीब ₹2,742 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है। ED का दावा है कि, कोयला तस्करी से जुड़े नेटवर्क ने हवाला के जरिए बड़ी रकम अलग-अलग चैनलों से भेजी।
मुख्य आरोप-
हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम फैसला अदालत में होना बाकी है।
ED ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचाया है और राज्य सरकार पर जांच में बाधा डालने का आरोप लगाया है। एजेंसी ने CBI जांच की भी मांग की है। वहीं, TMC और राज्य सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है और चुनाव से पहले दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।
|
तारीख |
घटनाक्रम |
|
27 नवंबर 2020 |
CBI ने FIR दर्ज की |
|
28 नवंबर 2020 |
ED ने जांच शुरू की |
|
8 जनवरी 2026 |
कोलकाता में I-PAC पर छापा |
|
2 अप्रैल 2026 |
कई शहरों में रेड |
|
14 अप्रैल 2026 |
विनेश चंदेल गिरफ्तार |
I-PAC यानी इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी कंपनी है, जो चुनावी रणनीति बनाने का काम करती है। यह डेटा, सर्वे और ग्राउंड कैंपेन के जरिए पार्टियों को चुनाव जीतने में मदद करती है। पश्चिम बंगाल में यह कंपनी TMC के लिए काम कर रही है, इसलिए इसके किसी बड़े अधिकारी की गिरफ्तारी का सीधा असर चुनावी रणनीति पर पड़ सकता है।