'मुझे अपने भारतीय सास-ससुर पर गर्व है', H-1B विवाद के बीच जेडी वेंस ने क्यों दी सफाई?

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी कर्मचारियों को ‘बंधुआ मजदूर’ बताने वाली अपनी टिप्पणी का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि उनके बयान का मकसद विदेशी कर्मचारियों की आलोचना करना नहीं, बल्कि उन अमेरिकी कंपनियों पर सवाल उठाना था, जो अपने कर्मचारियों का शोषण करती हैं। इस दौरान वेंस ने अमेरिका की इमिग्रेशन यानी प्रवासन नीति का भी समर्थन किया और अपनी पत्नी उषा वेंस की भारतीय विरासत का जिक्र किया।
H-1B वीजा पर अपने बयान को लेकर क्या बोले जेडी वेंस?
एक कार्यक्रम के दौरान जेडी वेंस ने अपने पुराने बयान पर सफाई दी। उन्होंने माना कि अपनी बात रखने के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द का इस्तेमाल करना शायद सही तरीका नहीं था। उन्होंने कहा कि उनकी गलती शब्दों के चुनाव में थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनका निशाना H-1B वीजा पर अमेरिका में काम करने वाले विदेशी पेशेवर नहीं, बल्कि वे कंपनियां थीं, जो इस व्यवस्था का गलत फायदा उठाती हैं। उनका कहना है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें ऐसी स्थिति में डाल देती हैं, जहां उनके पास अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने के सीमित विकल्प होते हैं।
उषा वेंस की भारतीय विरासत का किया जिक्र
कार्यक्रम के दौरान जेडी वेंस ने अपने परिवार के बारे में भी बात की। उन्होंने अपनी पत्नी उषा वेंस के भारतीय मूल का जिक्र करते हुए कहा कि वह अपने सास-ससुर से बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके सास-ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आकर बसे थे और उनकी बेटी उषा का जन्म अमेरिका में हुआ था। उषा वेंस अमेरिका की सेकंड लेडी हैं। वेंस ने कहा कि उन्हें अपने परिवार पर गर्व है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों और प्रवासियों को लेकर बहस चल रही है। H-1B वीजा के मुद्दे पर उनकी टिप्पणी को लेकर भी चर्चा हो रही है।
अमेरिकी कर्मचारियों और विदेशी कामगारों के बीच संतुलन की बात
जेडी वेंस ने कहा कि अमेरिका की इमिग्रेशन व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें देश के लिए उपयोगी लोगों का स्वागत किया जाए और अमेरिकी कामगारों के हितों की भी रक्षा हो। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन सिस्टम में संतुलन जरूरी है। जानकारी के मुताबिक, कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से हटाकर उनकी जगह विदेशी कर्मचारियों को रख लेती हैं। उन्होंने चिंता जताई कि H-1B वीजा पर काम करने वाले कर्मचारी कई बार अपनी नौकरी और अमेरिका में रहने की अनुमति के लिए पूरी तरह कंपनी पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में अगर कोई कर्मचारी अपने नियोक्ता के खिलाफ शिकायत करता है या उसके फैसले को चुनौती देता है, तो उसे नौकरी जाने के साथ अमेरिका में रहने से जुड़ी परेशानियों का भी सामना करना पड़ सकता है। वेंस का तर्क है कि इससे कंपनियों के हाथ में कर्मचारियों पर जरूरत से ज्यादा नियंत्रण आ जाता है।
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H-1B वीजा सिस्टम पर क्यों उठ रहे सवाल?
H-1B वीजा अमेरिका में विदेशी पेशेवरों को विशेष कौशल वाली नौकरियों में काम करने की अनुमति देता है। भारतीय आईटी पेशेवर भी इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था को लेकर अमेरिका में लंबे समय से बहस होती रही है। वेंस का कहना है कि समस्या उन लोगों में नहीं है, जो अमेरिका में रोजगार और बेहतर अवसर तलाशने आते हैं, बल्कि उस व्यवस्था में है, जो विदेशी कर्मचारियों को शोषण के जोखिम में डाल सकती है। उनके मुताबिक, नियम ऐसे होने चाहिए, जिनसे कंपनियां कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा न उठा सकें।
विदेशी कर्मचारियों से जुड़े कार्यक्रम पर भी विवाद
इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों समेत कई कंपनियों को एक ऐसे कार्यक्रम से निलंबित कर दिया, जिसके तहत विदेशी कर्मचारी ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते थे। अमेरिकी पक्ष का तर्क था कि इस व्यवस्था से अमेरिकी नागरिकों के रोजगार के अवसर प्रभावित हो रहे थे। इस फैसले की घोषणा के दौरान जेडी वेंस ने H-1B वीजा पर काम करने वाले विदेशी पेशेवरों के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द का इस्तेमाल किया था। अब उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी आलोचना कर्मचारियों के बजाय कंपनियों और व्यवस्था को लेकर थी। जेडी वेंस का कहना है कि अमेरिका को ऐसी इमिग्रेशन नीति की जरूरत है, जो विदेशी प्रतिभाओं के लिए अवसर बनाए रखे, लेकिन अमेरिकी कर्मचारियों के हितों और विदेशी कामगारों के अधिकारों की भी रक्षा करे।




















