मंगल के चांद से सैंपल लाएगा जापान, 578 मिलियन डॉलर के MMX मिशन को किया लॉन्च

टोक्यो। जापान ने मंगल ग्रह के चंद्रमाओं से सैंपल लाने के लिए 578 मिलियन डॉलर (54,74,81,72,600 रुपए) का महत्वाकांक्षी मिशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि मंगल के दो चंद्रमा फोबोस और डीमोस का निर्माण कैसे हुआ था। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने 20 अक्टूबर को तनेगाशिमा स्पेस सेंटर से H3 रॉकेट के जरिए 'मार्शियन मून्स एक्सप्लोरेशन' (MMX) स्पेसक्राफ्ट को लॉन्च किया। रॉयटर्स के अनुसार, यह यान अगस्त 2027 में मंगल प्रणाली तक पहुंचेगा और 2031 में सैंपल लेकर पृथ्वी पर लौटने की उम्मीद है। इस मिशन का मुख्य लक्ष्य फोबोस से कम से कम 10 ग्राम मटीरियल इकट्ठा करना है। यह मंगल के दो चंद्रमाओं में बड़ा और करीब वाला चंद्रमा है।
… तो पहला देश बन जाएगा जापान
अगर यह मिशन सफल होता है तो यह मंगल के किसी चंद्रमा से सैंपल वापस लाने वाला दुनिया का पहला मिशन बन जाएगा। इससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी की लैब में स्टडी करने के लिए अनमोल सामग्री मिलेगी। ग्रह विज्ञान के अलावा, MMX उन तकनीकों का भी परीक्षण करेगा जो भविष्य के मंगल मिशनों के लिए जरूरी होंगी, जैसे सतह पर उतरना, सैंपल इकट्ठा करना और लंबी दूरी तय कर सामग्री को वापस लाना।
फोबोस को ही क्यों चुना गया
फोबोस वैज्ञानिकों को मंगल प्रणाली की जांच का एक आसान तरीका देता है। इसमें सीधे मंगल ग्रह से सैंपल लाने जैसी जटिल प्रक्रिया नहीं करनी पड़ती। फोबोस का आकार लगभग 27 किमी x 22 किमी x 18 किमी है और यह मंगल से करीब 6,000 किमी ऊपर परिक्रमा करता है। इसका गुरुत्वाकर्षण बहुत कम है, इसलिए यहां लैंडिंग और सैंपल कलेक्शन किसी अधिक गुरुत्वाकर्षण वाले ग्रह की तुलना में तकनीकी रूप से काफी अलग है।
मंगल के करीब होने से एक और फायदा
वैज्ञानिकों का मानना है कि फोबोस पर मंगल से टकराने वाले उल्कापिंडों से निकला मलबा जमा हो सकता है। इस मलबे की स्टडी से अरबों सालों में मंगल के विकास के सबूत मिल सकते हैं। फोबोस में सौर मंडल के छोटे पिंडों की बनावट और इतिहास से जुड़े सुराग भी छिपे हो सकते हैं। क्या यह मंगल के साथ टक्कर से बना या कहीं और से आकर फंसा, यह जानने से शोधकर्ताओं को ग्रह प्रणालियों के निर्माण को समझने में मदद मिलेगी।
यह प्रोब क्या करेगा
MMX अंतरिक्ष यान लगभग एक साल की यात्रा के बाद अगस्त 2027 में मंगल प्रणाली तक पहुंचेगा। वहां पहुंचने के बाद यह फोबोस का क्लोज ऑब्जर्वेशन करेगा और फ्लाईबाई के दौरान डीमोस का भी अध्ययन करेगा। फोबोस की सतह की जांच और लैंडिंग के लिए सबसे सुरक्षित लोकेशन तय करने में मदद के लिए 'IDEFIX' नाम का फ्रेंच-जर्मन रोवर भेजा जाएगा। मुख्य स्पेसक्राफ्ट के 2029-30 के आसपास फोबोस पर लैंड करने और अपने वैज्ञानिक उपकरणों से सैंपल कलेक्ट करने की उम्मीद है। JAXA का लक्ष्य सतह से कम से कम 10 ग्राम सामग्री वापस लाना है। सैंपल कलेक्शन के बाद अंतरिक्ष यान मंगल प्रणाली से बाहर निकलकर पृथ्वी की ओर वापसी यात्रा शुरू करेगा। अनुमान है कि सैंपल वाला रिटर्न कैप्सूल 2031 में पृथ्वी पर पहुंचेगा। इस पूरे मिशन की अवधि करीब पांच साल तय की गई है।




















