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Peoples Update Special :इंदौर का आयुर्वेदिक कॉलेज हुआ डिजिटल, छात्र ने बनाया मेडिकल रिकॉर्ड का ऐप

इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के एक छात्र ने पीके आईपीडी लाइटनिंग फास्ट ऐप बनाया है। इससे मरीजों की जांच डॉक्टर्स को क्यूआर कोड स्कैन करते ही मोबाइल या टैब पर मिल जाएगी। इससे डॉक्टर्स का काम आसान होगा।
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इंदौर का आयुर्वेदिक कॉलेज हुआ डिजिटल, छात्र ने बनाया मेडिकल रिकॉर्ड का ऐप
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रभा उपाध्याय, इंदौर। शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय के एक छात्र ने आयुर्वेदिक अस्पताल की कागजी व्यवस्था को डिजिटल बनाने की पहल की है। बीएएमएस अंतिम वर्ष के छात्र केशव चौहान ने 1 महीने में ‘पीके आईपीडी लाइटनिंग फास्ट’ नामक ऐप विकसित किया है, इससे मरीजों की भर्ती से लेकर मेडिकल रिकॉर्ड तक की पूरी जानकारी अब क्यूआर कोड स्कैन करते ही डॉक्टरों के मोबाइल-टैब पर तुरंत उपलब्ध हो सकेगी।

    25 बेड से की जा रही शुरुआत

    पंचकर्म विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार ओझा ने बताया कि इस ऐप को गुड़ी पड़वा से लागू कर दिया है। 25 बेड पर शुरुआत की जाएगी। बाद में इसकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इसके पहले दो मरीजों के बेड पर क्यूआर कोड लगाकर प्रयोग कर चुके हैं, जो सफल रहा।

    ऐप बनाने का विचार कैसे आया

    कॉलेज के फाइनल ईयर के स्टूडेंट केशव चौहान ने बताया कि मरीजों की जानकारी, दैनिक वाइटल्स, पंचकर्म प्रक्रियाएं और रिपोर्ट अलग-अलग फाइलों में होती है। इससे जानकारी ढूंढने में समय लगता है और अपडेट करना कठिन होता है। इसी समस्या को देखते हुए उन्हें ऐप बनाने का आइडिया आया। प्रिस्क्रिप्शन भी सीधे ऐप में रिकॉर्ड किए जा सकेंगे।

    ये जानकारी मिलेगी QR स्कैन करने पर 

    मरीज का नाम, निदान, रक्तचाप, नाड़ी, वर्तमान शिकायतें, मल-मूत्र की स्थिति, जिह्वा और अन्य आयुर्वेदिक पैरामीटर दर्ज रहेंगे। दैनिक वाइटल्स, पंचकर्म प्रक्रियाएं, रिपोर्ट, ईसीजी और प्रिस्क्रिप्शन भी सीधे ऐप में सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड किए जा सकेंगे।

    ऐप के प्रमुख फायदे

    • मरीज की जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी।
    • कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता कम होगी।
    • दैनिक वाइटल्स और पंचकर्म रिकॉर्ड दर्ज करना आसान होगा।
    • स्वचालित डिस्चार्ज समरी बनकर तैयार होगी।
    • प्रशासन को डैशबोर्ड के माध्यम से जानकारी मिलेगी।
    • सुरक्षित और व्यवस्थित रिकॉर्ड रहेगा।
    • समय और संसाधनों की बचत होगी।

    मरीजों की बेहतर देखभाल होगी

    यह नवाचार छात्रों के लिए प्रेरणादायक होगा। इस डिजिटल ऐप से मरीजों की देखभाल और प्रबंधन तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनने की उम्मीद है।   

    डॉ. अजीत पाल सिंह, प्राचार्य, शासकीय अष्टांग आयुर्वेद कॉलेज

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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