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60 डिग्री से अधिक तापमान पर स्वतः खुल जाता है यह डिजिटल लॉकक्या हैं 8 मौतों का राज , फिर क्यों नहीं खुला उस दिन दरवाजा- पढ़े

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क्या हैं 8 मौतों का राज , फिर क्यों नहीं खुला उस दिन दरवाजा- पढ़े
डिजिटल लॉक में लगती हैं लिथियम बेटरी व सेल
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    इंदौर।
    “दरवाज़े पर लटका हूँ मैं खामोशी का पहरेदार,
    जिसके पास चाबी है, वही मेरा असली यार।”

    यह पंक्तियाँ पढ़ते ही साफ हो जाता है कि बात उस ताले की हो रही है, जो आपके घर के मुख्य द्वार पर शांत खड़ा रहता है, लेकिन भीतर की सुरक्षा का सबसे मजबूत प्रहरी होता है। यही ताला किसी भी अनचाहे व्यक्ति को घर में प्रवेश करने से रोकता है और आपके परिवार की सुरक्षा की पहली दीवार बनता है।

    ब्रजेश्वरी (एनएक्स) के दर्दनाक अग्निकांड में  उद्योगपति मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने ईवी कार में शॉर्ट सर्किट से इनकार कर दिया है। उसका दावा है कि आग घर के आगे लगे बिजली के खंभे से निकली चिंगारी से फैली है। सौरभ ने फायर ब्रिगेड पर भी डेढ़ घंटे की देरी से पहुंचने और समय पर पानी न पहुंचाने के आरोप लगाए हैं। इस पूरी घटना के बाद पीपुल्स अपडेट कि टीम ने डिजिटल लॉक को लेकर चल रही अफवाह को लेकर बाजार का रुख किया। जिसमे कई बाते निकल कर सामने आई। 

    इंदौर में बीते समय में सामने आई कुछ घटनाओं ने इस “पहरेदार” पर सवाल खड़े कर दिए। पिछले वर्ष एक उद्योगपति के घर में आग लगने के बाद यह चर्चा जोर पकड़ गई थी कि घर में लगे डिजिटल लॉक के नहीं खुलने से जानें गईं। वहीं, हाल ही में तिलक नगर क्षेत्र के प्रीति नगर स्थित ब्रजेश्वरी एनेक्सी में लगी भीषण आग के बाद एक ही परिवार के 8 लोगों की मौत ने इस बहस को फिर हवा दे दी। लगातार मीडिया में यह आशंका जताई जा रही है कि डिजिटल लॉक के कारण लोग घर से बाहर नहीं निकल पाए।

    इन घटनाओं के बाद पीपुल्स डिजिटल की टीम ने इंदौर के सबसे बड़े ताला कारोबारियों में शामिल एक व्यापारी से बातचीत कर इस पूरे मामले की सच्चाई जानने की कोशिश की। व्यापारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक लॉक को लेकर जो भ्रांतियां फैल रही हैं, वे पूरी तरह निराधार हैं।  

    ताला कारोबारी से कुछ सीधे सवाल - 

    सवाल 1: क्या घर का इलेक्ट्रॉनिक लॉक आपकी सुरक्षा करता है?
    जवाब: हाँ, इलेक्ट्रॉनिक लॉक का मुख्य उद्देश्य आपके घर और परिवार की सुरक्षा करना है।

     

     सवाल 2 : लोग क्यों कह रहे हैं कि लॉक खतरनाक हो सकता है?
    जवाब: हाल की कुछ घटनाओं के बाद भ्रम फैल गया है, लेकिन उन घटनाओं का कारण लॉक नहीं बल्कि अन्य तकनीकी या हादसे से जुड़े कारण हो सकते हैं।

     

    सवाल 3 : इलेक्ट्रॉनिक लॉक कैसे काम करता है?
    जवाब: यह लॉक बाहर से कई तरीकों से खुलता है—

    • नंबर (पासकोड)
    • कार्ड
    • अंगूठा (फिंगरप्रिंट)
    • चाबी
    • मोबाइल

     

    सवाल 4 : अगर सिस्टम फेल हो जाए या बिजली चली जाए तो क्या होगा?
    जवाब: अंदर से लॉक पूरी तरह मैनुअल रहता है। आप हैंडल दबाकर आसानी से दरवाज़ा खोल सकते हैं।

     

    सवाल 5 : क्या आग लगने की स्थिति में लॉक खुलता है?
    जवाब: हाँ, कई इलेक्ट्रॉनिक लॉक में सुरक्षा फीचर होता है—अगर तापमान 55–60°C तक पहुंचता है, तो दरवाज़ा स्वतः खुल जाता है।

     

    सवाल 6 : क्या बैटरी (लिथियम या पेंसिल सेल) खतरनाक होती है?
    जवाब: नहीं, बैटरी का लॉक से कोई खतरनाक संबंध नहीं है। यह केवल सिस्टम को चलाने के लिए होती है।

     

    सवाल 9 : अगर बैटरी खत्म हो जाए तो क्या व्यक्ति अंदर फंस सकता है?
    जवाब: नहीं, अंदर से लॉक मैनुअल रहता है, इसलिए आप हमेशा हैंडल से बाहर निकल सकते हैं।

     

    सवाल 10 : क्या शॉर्ट सर्किट का इलेक्ट्रॉनिक लॉक से कोई संबंध है?
    जवाब: नहीं, शॉर्ट सर्किट और लॉक का कोई सीधा संबंध नहीं होता।

     

    सवाल 11 : क्या सभी कंपनियों के लॉक में यही सिस्टम होता है?
    जवाब: हाँ, चाहे कोई भी ब्रांड हो, सभी इलेक्ट्रॉनिक लॉक अंदर से मैनुअल ऑपरेशन के साथ आते हैं।

     

    सवाल 12 : लोगों में जो डर फैल रहा है, वह सही है या गलत?
    जवाब: यह पूरी तरह गलत और भ्रम है। इलेक्ट्रॉनिक लॉक सुरक्षित हैं और किसी भी आपात स्थिति में बाहर निकलने का विकल्प देते हैं।

    व्यापारी के अनुसार, “घर के अंदर मौजूद व्यक्ति को लॉक खोलने के लिए किसी भी इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। अंदर लगा सामान्य हैंडल घुमाते ही दरवाज़ा तुरंत खुल जाता है। इसमें ऐसा कोई फंक्शन नहीं होता जिससे दरवाज़ा जाम हो जाए या खुलने में देरी लगे।”

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन लॉक में सुरक्षा के विशेष प्रावधान होते हैं। यदि किसी कारणवश आग लगने की स्थिति में तापमान 55 से 60 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचता है, तो अधिकांश आधुनिक डिजिटल लॉक स्वतः अनलॉक हो जाते हैं, ताकि अंदर मौजूद व्यक्ति आसानी से बाहर निकल सके।

    इसके अलावा, लॉक में उपयोग होने वाली लिथियम बैटरी या पेंसिल सेल को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है। व्यापारी ने कहा कि बैटरी का कार्य केवल बाहरी सिस्टम को संचालित करना होता है, इसका अंदर से लॉक खुलने की प्रक्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं है। बैटरी समाप्त हो जाने या किसी तकनीकी समस्या की स्थिति में भी अंदर से लॉक मैनुअल तरीके से आसानी से खोला जा सकता है। स्पष्ट है कि हालिया हादसों में डिजिटल लॉक को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी और अधूरी जानकारी पर आधारित निष्कर्ष है।

    Hemant Nagle
    By Hemant Nagle

    हेमंत नागले | पिछले बीस वर्षों से अधिक समय से सक्रिय पत्रकारिता में हैं। वर्ष 2004 में मास्टर ऑफ जर्...Read More

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