इंदौर के ब्रजेश्वरी (एनएक्स) स्थित अर्हम विला अग्निकांड में अब वो सच सामने आ गया है, जिसने पूरे घटनाक्रम की दिशा बदल दी है। सात दिन की चुप्पी के बाद आखिरकार पुगलिया परिवार के बेटों ने कबूल लिया कि हादसे वाली रात इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग पर लगी थी। यानी जिस ‘संदेह’ को अफवाह बताया जा रहा था, वही अब हकीकत बनकर सामने आ गया है।
बेटों के बयान दर्ज
बुधवार को पुलिस की सख्त पूछताछ में मनोज पुगलिया के बेटों सौरभ और हर्षित के बयान दर्ज किए गए। घंटों चली पूछताछ में हर्षित ने साफ किया कि उसने रात करीब 11 बजे कार को चार्जिंग पर लगाया था। वहीं सौरभ ने पहले इनकार किया, लेकिन बाद में माना कि कार चार्जिंग पर थी, हालांकि उसे इसकी जानकारी बाद में हुई। इस कबूलनामे ने बिजली कंपनी और फायर सेफ्टी की शुरुआती रिपोर्ट पर मुहर लगा दी है। याद रहे कि पिछले बुधवार को अर्हम विला में लगी भीषण आग ने 8 लोगों को जिंदा जला दिया था। इस दर्दनाक हादसे में मनोज पुगलिया, सिमरन पुगलिया, विजय सेठिया, सुमन सेठिया, रुचिका संचेती, राशि, तनय और कार्तिक की मौत दम घुटने और जलने से हुई थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि घटना के बाद सौरभ ने खुद मुख्यमंत्री से शिकायत कर पुलिस पर ‘अफवाह फैलाने’ का आरोप लगाया था और दावा किया था कि कार चार्जिंग पर थी ही नहीं। लेकिन अब उसी परिवार के भीतर से निकली सच्चाई ने उस दावे की पोल खोल दी है।
स्मार्ट मीटर ने खोला राज
बिजली कंपनी के डिजिटल डेटा ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि कार रात 11 बजे से तड़के 3 बजे तक लगातार चार्जिंग पर थी। स्मार्ट मीटर में 9 किलोवाट तक लोड दर्ज हुआ, जो सीधे तौर पर EV चार्जिंग की ओर इशारा करता है। घर में 15 किलोवाट का कनेक्शन था, जिस पर यह भारी लोड सिस्टम पर दबाव बना रहा था।
घर में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर भी मौजूद थे, जिसने आग को और भयावह बना दिया। परिजनों के मुताबिक, ये सिलेंडर हाल ही में हुए पारिवारिक कार्यक्रम के बाद बचे हुए थे।
जांच की आंच और तेज
फिलहाल फोरेंसिक, बिजली कंपनी और EV एक्सपर्ट की रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन शुरुआती तथ्यों ने साफ कर दिया है कि यह हादसा लापरवाही और तकनीकी दबाव का खतरनाक मेल था।