दिन में जिस घर की बनाता था डुप्लीकेट चाबी, रात में उसी में डालता था डाका

इंदौर/दिल्ली। अगर आप घर के ताले की डुप्लीकेट चाबी बनवाने के लिए कॉलोनी में घूमने वाले किसी अनजान चाबी बनाने वाले को अपना ताला-चाबी सौंपते हैं, तो जरा सावधान हो जाइए। दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही एक शातिर चोर को पकड़ा है, जो दिन में कॉलोनियों में घूमकर लोगों के ताले की डुप्लीकेट चाबी बनाता था और इसी दौरान चोरी का पूरा रास्ता तैयार कर लेता था।
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पुलिस के मुताबिक आरोपी शेर सिंह उर्फ शेरा, निवासी आकाश नगर, इंदौर, चाबी बनाने की आड़ में घरों की रेकी करता था। मौका मिलते ही वह चाबी की एक अतिरिक्त नकल अपने पास रख लेता था। इसके बाद रात में उसी चाबी से घर का ताला खोलकर नकदी, जेवर और महंगे सामान पर हाथ साफ कर देता था। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि आरोपी चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद दिल्ली में रुकता नहीं था। पुलिस के अनुसार वह वारदात के बाद वापस इंदौर लौट आता था, जिससे पुलिस को उसकी तलाश में मुश्किल होती थी।
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चाबी बनाने आया था या घरों की रेकी करने?
पुलिस की जांच में सामने आया कि शेर सिंह दिन के समय कॉलोनियों में घूमकर चाबी बनाने का काम करता था। यही उसका सबसे बड़ा हथियार था। वह घरों के ताले खोलने और उनकी चाबी बनाने के दौरान घर के अंदर-बाहर की स्थिति पर नजर रखता था। पुलिस के अनुसार इसी दौरान वह चोरी के लिए उपयुक्त घरों को चिन्हित करता और चाबी की कथित तौर पर अतिरिक्त नकल अपने पास रख लेता था। फिर रात का इंतजार करता। जिस घर को दिन में निशाना बनाया गया, वहां रात में पहुंचकर बिना ताला तोड़े चाबी से लॉक खोलने की कोशिश करता और चोरी कर फरार हो जाता था।
गश्त के दौरान चाकू ने खोल दिया चोर का राज
मामला उस समय खुला जब कालकाजी थाने के हेड कांस्टेबल भरत भूषण मंगलवार रात नियमित गश्त पर थे।कालकाजी डीडीए फ्लैट स्थित एमसीडी प्राइमरी स्कूल के पास पुलिसकर्मी की नजर एक संदिग्ध व्यक्ति पर पड़ी। पुलिस को देखते ही वह भागने लगा। भरत भूषण ने पीछा कर उसे दबोच लिया। तलाशी लेने पर उसके पास से बटनदार चाकू बरामद हुआ। शुरुआत में पुलिस उसे सामान्य अपराधी मानकर थाने लाई और एएसआई किशन के हवाले कर दिया। लेकिन पूछताछ आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने उसकी आपराधिक कुंडली खुलती चली गई।
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इंदौर में करीब 10 मामले, दिल्ली में 24 से ज्यादा केस
आरोपी की पहचान शेर सिंह उर्फ शेरा, निवासी आकाश नगर, इंदौर के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक इंदौर में शेर सिंह के खिलाफ मारपीट और चोरी के करीब 10 मामले दर्ज हैं। पूछताछ में उसने बताया कि इंदौर में दर्ज ज्यादातर मामले मारपीट से संबंधित हैं। उसका कहना था कि चोरी करने के लिए वह खास तौर पर दिल्ली आता था। पुलिस के अनुसार डुप्लीकेट चाबी बनाने के दौरान यदि उसे चोरी का मौका मिल जाता तो वह उसी समय वारदात की कोशिश करता था। यदि उस समय कामयाब नहीं होता तो रात में लौटकर चोरी करता और फिर इंदौर भाग जाता था।
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क्राइम कुंडली खंगाली तो पुलिस भी रह गई हैरान
मामले की जांच आगे बढ़ी तो कालकाजी एसएचओ अजय कुमार ने आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। यहीं से मामला और चौंकाने वाला हो गया। पुलिस के अनुसार नेब सराय, सफदरजंग एन्क्लेव, महरौली, मुखर्जी नगर, विजय विहार, डीबीजी रोड और मानसरोवर पार्क थानों में शेर सिंह के खिलाफ चोरी और सेंधमारी के 24 से अधिक मामले पहले से दर्ज मिले। पुलिस के मुताबिक आरोपी सफदरजंग एन्क्लेव और नेब सराय थाने का भगोड़ा अपराधी भी था। यानी जिस व्यक्ति को पुलिस ने शुरुआत में एक संदिग्ध के रूप में पकड़ा था, उसकी पहचान सामने आने के बाद वह दिल्ली के कई थाना क्षेत्रों में दर्ज चोरी और सेंधमारी के मामलों से जुड़ा आरोपी निकला।
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चाबी बनाना था रोजगार या चोरी का ‘पासवर्ड’?
शेर सिंह का तरीका पुलिस के लिए भी खासा चौंकाने वाला बताया जा रहा है। वह दिन में चाबी बनाने वाले कारीगर की तरह कॉलोनियों में घूमता था और इसी बहाने लोगों के घरों के ताले तक पहुंच बनाता था। पुलिस के अनुसार इसी दौरान वह संभावित घरों को चिन्हित करता और उनकी चाबी की नकल अपने पास रख लेता था। रात में उसी जानकारी और कथित डुप्लीकेट चाबी के सहारे घर में प्रवेश कर चोरी करता था। इस तरीके में ताला टूटने के निशान नहीं मिलते थे, जिससे शुरुआती तौर पर चोरी का तरीका भी सामान्य सेंधमारी से अलग दिखाई देता था।
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दिल्ली में चोरी, इंदौर में पनाह
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि शेर सिंह का कथित चोरी का नेटवर्क दिल्ली तक सीमित था, जबकि वारदात के बाद वह इंदौर लौट जाता था। पुलिस के मुताबिक दिल्ली में चोरी के बाद इंदौर लौटना उसकी रणनीति का हिस्सा था। इससे वह स्थानीय पुलिस की पकड़ से बचने की कोशिश करता था।अब दिल्ली पुलिस उसके पुराने मामलों और अन्य वारदातों में उसकी संभावित भूमिका की भी जांच कर रही है।
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चाबी बनवाने वालों के लिए बड़ा सबक
इस मामले ने आम लोगों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। घर की चाबी किसी अनजान व्यक्ति को सौंपते समय उसकी पहचान और भरोसेमंद होने की पुष्टि करना जरूरी है। खासकर कॉलोनियों में घूम-घूमकर चाबी बनाने वाले लोगों से सावधानी बरतना जरूरी है। पुलिस के मुताबिक हर चाबी बनाने वाला अपराधी नहीं होता, लेकिन अनजान व्यक्ति को ताले और चाबी तक पहुंच देना सुरक्षा के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है।














