India Japan Summit 2026 : PM मोदी ने साने ताकाइची को बताया 'छोटी बहन', सेमी कंडक्टर, AI जैसे विषयों पर की बात

नई दिल्ली। हैदराबाद हाउस में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की मौजूदगी में दोनों देशों ने सहयोग ज्ञापन (MoC) पर दस्तखत किए। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में ताकाइची का गर्मजोशी से स्वागत करते हुए उन्हें अपनी खूबसूरत छोटी बहन बताया। उन्होंने कहा कि जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में उनकी यह पहली भारत यात्रा ऐतिहासिक है। मोदी ने कहा कि ताकाइची नारा प्रीफेक्चर से आती हैं, जो भारत और जापान की साझा बौद्ध विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह यात्रा दोनों देशों की विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगी।
AI और टेक्नोलॉजी साझेदारी पर बड़ा संयुक्त बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में आपसी विश्वास किसी भी रणनीतिक साझेदारी की सबसे बड़ी ताकत होता है। उन्होंने हाल ही में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत और जापान का रिश्ता इसी भरोसे की मजबूत नींव पर खड़ा है। मोदी ने बताया कि दोनों देशों ने AI के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण संयुक्त बयान जारी किया है। उनका कहना था कि जापान की अत्याधुनिक और सटीक तकनीक तथा भारत की मजबूत सॉफ्टवेयर क्षमता का मेल वैश्विक AI विकास को नई दिशा देगा। उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप दोनों देशों के सहयोग का सबसे मजबूत स्तंभ बनेगी।
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रक्षा सहयोग में पहली सह-विकास परियोजना पर समझौता
भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कदम बढ़ाया है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि दोनों देशों के बीच पहली संयुक्त रक्षा सह-विकास (Co-development) परियोजना पर समझौता हुआ है। इसे दोनों देशों के रक्षा संबंधों में एक नई शुरुआत माना जा रहा है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता, रणनीतिक सहयोग और रक्षा तकनीक के आदान-प्रदान को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र, समृद्ध और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र उनकी साझा प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए सहयोग लगातार बढ़ाया जाएगा।
सेमीकंडक्टर, दवा उद्योग और सप्लाई चेन पर विशेष फोकस
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक में आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। बातचीत में सेमीकंडक्टर निर्माण, महत्वपूर्ण खनिजों की उपलब्धता, फार्मास्यूटिकल्स, उभरती तकनीकों, डिजिटल नवाचार और मजबूत वैश्विक सप्लाई चेन विकसित करने जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों देशों ने निवेश बढ़ाने, अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में निजी कंपनियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई। इससे भारत और जापान के आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं ताकाइची
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची 1 से 3 जुलाई तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के अलावा कई अन्य कार्यक्रमों में भी शामिल होंगी। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देश द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की व्यापक समीक्षा करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करना है, ताकि भविष्य की वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना किया जा सके।
बिजनेस फोरम में निवेश और व्यापार पर मंथन
भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ताकाइची भारत-जापान बिजनेस फोरम में भी हिस्सा लेंगी। इस मंच पर दोनों देशों के उद्योग जगत और सरकारी प्रतिनिधि निवेश, व्यापार, विनिर्माण और औद्योगिक सहयोग बढ़ाने के उपायों पर चर्चा करेंगे। भारत और जापान पिछले कई वर्षों से बुनियादी ढांचे, हाई-स्पीड रेल, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। वर्ष 2014 में दोनों देशों के रिश्तों को 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का दर्जा दिया गया था। वर्ष 2027 में दोनों देश राजनयिक संबंधों की स्थापना के 75 वर्ष पूरे करेंगे, जिसे लेकर भी कई संयुक्त कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।












