प्रभा उपाध्याय, इंदौर। बदलती जीवनशैली और अनियमित खानपान का असर अब लोगों की सेहत पर भारी पड़ने लगा है। इंदौर में किडनी रोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय अस्पताल में पिछले पांच वर्षों में डायलिसिस के मामलों में करीब 59 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2025 में यहां 5000 से अधिक मरीजों का डायलिसिस किया गया।
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. प्रदीप सालगिया ने बताया कि शहर में वर्तमान में 500 से अधिक डायलिसिस मशीनें उपलब्ध हैं। वहीं करीब 3500 से अधिक मरीज किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। पिछले दस वर्षों में शहर में 84 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। वहीं 189 मरीज अभी भी किडनी ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग सूची में हैं
एमवाय अस्पताल की डायलिसिस यूनिट की नर्सिंग हेड निखिता यादव के अनुसार, एमवाय में शुरुआत केवल दो डायलिसिस मशीनें थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब यहां 18 मशीनें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा हेपेटाइटिस संक्रमित मरीजों के लिए अलग मशीन की व्यवस्था है। यहां एचआईवी पॉजिटिव मरीजों का भी सुरक्षित तरीके से डायलिसिस किया जाता है। बुधवार को 12 मरीजों की डायलिसिस की गई।
36 वर्षीय आकाश वर्मा बताते हैं कि वह 2023 से किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं। अब तक वह 105 से अधिक बार डायलिसिस करा चुके हैं। वे एमवाय अस्पताल में सप्ताह में दो बार डायलिसिस करवाते हैं। परिवार से किसी से भी किडनी मैच नहीं हुई है।
आजकल किडनी की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। इसका प्रमुख कारण मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली है। जंक फूड, कम पानी पीना और बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाओं का उपयोग भी किडनी को नुकसान पहुंचाता है। नियमित जांच और संतुलित आहार से सेक्रॉनिक किडनी डिजीज के खतरे को कम किया जा सकता है। इसके लिए स्कूलों में जागरुकता अभियान भी चलाया जाएगा।
डॉ. प्रदीप सालगिया, नेफ्रोलॉजिस्ट