ईरान की ना-नुकुर के बीच IAEA चीफ का बड़ा बयान,बोले- परमाणु ठिकानों का निरीक्षण होकर रहेगा

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एब बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा है कि ईरान के परमाणु ठिकानों का निरीक्षण हर हाल में किया जाएगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब तेहरान लगातार यह संकेत दे रहा है कि फिलहाल संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को संवर्धन स्थलों तक पहुंच देने की कोई योजना नहीं है। राफेल ग्रॉसी का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते में परमाणु गतिविधियों की निगरानी को प्रमुख शर्तों में शामिल किया गया है। इस समझौते के बाद दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर कितनी पारदर्शिता दिखाता है।
IAEA प्रमुख ने दिया संदेश
जापान के फुकुशिमा दाइची परमाणु संयंत्र में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राफेल मारियानो ग्रॉसी ने कहा कि राजनीतिक बयान अपनी जगह हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते में IAEA की निगरानी की व्यवस्था स्पष्ट रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि समझौते में साफ लिखा गया है कि परमाणु सामग्री और परमाणु सुविधाओं से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी IAEA करेगी। इसके लिए निरीक्षण जरूरी है। यह परसों हो, एक सप्ताह बाद हो या दस दिन बाद, लेकिन होगा जरूर।
अमेरिका और ईरान के दावों में दिखा विरोधाभास
23 जून को इस मुद्दे पर अमेरिका और ईरान के बयान एक-दूसरे से बिल्कुल अलग नजर आए थे। अमेरिकी पक्ष ने दावा किया था कि ईरान ने परमाणु स्थलों के निरीक्षण की अनुमति देने पर सहमति जताई है। वहीं ईरान ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई मंजूरी नहीं दी गई है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा था कि पिछले वर्ष अमेरिकी हमलों का सामना करने वाले परमाणु स्थलों पर फिलहाल संयुक्त राष्ट्र निरीक्षकों के दौरे की कोई योजना नहीं है।
युद्ध के बाद बढ़ी निगरानी की जरूरत
2025 में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान ईरान की कई परमाणु सुविधाएं निशाने पर आई थीं। इसके बाद अमेरिका ने भी फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर B-2 बमवर्षक विमानों से हमले किए थे। इन हमलों के बाद से ईरान ने कई संवेदनशील परमाणु स्थलों तक IAEA की पहुंच सीमित कर दी थी। इसी कारण एजेंसी के लिए यह पता लगाना मुश्किल हो गया कि ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम की वास्तविक स्थिति क्या है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन स्थलों का निरीक्षण न होने से वैश्विक समुदाय के सामने कई सवाल बने हुए हैं।
यूरेनियम भंडार को लेकर बनी हुई है चिंता
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के पास बड़ी मात्रा में उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। यही वजह है कि IAEA इन भंडारों की स्थिति और उनसे जुड़े उपकरणों की जांच करना चाहती है। हालांकि ईरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और वह किसी परमाणु हथियार कार्यक्रम पर काम नहीं कर रहा। इसके बावजूद पश्चिमी देशों और परमाणु विशेषज्ञों की चिंताएं बनी हुई हैं।
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निरीक्षण क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
अमेरिका-ईरान अंतरिम समझौते के तहत संवर्धित यूरेनियम के स्तर को कम करने की प्रक्रिया भी शामिल है। इसके लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि वर्तमान में ईरान के पास कितना यूरेनियम मौजूद है और उसकी गुणवत्ता क्या है। IAEA का कहना है कि बिना प्रत्यक्ष निरीक्षण के किसी भी दावे की पुष्टि करना संभव नहीं है।












