बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइंगहाट उपजिला से जुड़ा है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर में आग लगा दी गई। इस घटना के बाद इलाके में रहने वाले हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है।
जिस घर को निशाना बनाया गया, वह बीरेंद्र कुमार डे का बताया जा रहा है। वे स्थानीय स्कूल में शिक्षक हैं और लोग उन्हें ‘झुनू सर’ के नाम से जानते हैं। जानकारी के अनुसार, अज्ञात लोगों ने रात के समय घर में आग लगा दी, जिससे पूरा मकान जलकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
आग इतनी तेजी से फैली कि घर में मौजूद सभी परिवार के सदस्यों को तुरंत बाहर निकलना पड़ा। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी की जान नहीं गई, लेकिन घर और उसमें रखा सारा सामान जलकर राख हो गया। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि आग जानबूझकर लगाई गई या इसके पीछे कोई और वजह थी।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घर में लगी आग और परिवार के लोगों को जान बचाकर भागते हुए देखा जा सकता है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोग, सामाजिक संगठन और मानवाधिकार कार्यकर्ता नाराजगी जता रहे हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
इस हमले ने एक बार फिर बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय हिंदू समुदाय का कहना है कि ऐसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई न होने से हमलावरों के हौसले और बढ़ रहे हैं।
बीते कुछ हफ्तों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू परिवारों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। पिरोजपुर जिले में दिसंबर के अंत में एक हिंदू परिवार का घर जलाया गया था। चटगांव के राउज़ान इलाके में भी प्रवासी हिंदू परिवारों के घरों में आग लगाने की घटनाएं हुई थीं। इन मामलों ने पूरे देश में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। मानवाधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि प्रशासन इस मामले में कितनी जल्दी और कितनी सख्ती से कार्रवाई करता है।