
असम की 126 सीटों पर वोटिंग पूरी हो चुकी है और 722 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। राज्य में इस बार 85 फीसदी से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया है। आंकड़े बताते है कि वोटिंग प्रतिशत में बदलाव का सीधा असर सत्ता पर पड़ता है। इस बार पिछले चुनाव से करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा वोटिंग हुई है। राजनीतिक दल इस बढ़े हुए मतदान के अपने-अपने मायने निकाल रहे हैं। अब नजरें इस बात पर हैं कि यह ट्रेंड सत्ता परिवर्तन लाएगा या सरकार बरकरार रहेगी।
असम में इस बार वोटिंग प्रतिशत ने नया ट्रेंड दिखाया है। राज्य के 35 जिलों में से 26 जिलों में 80 फीसदी से ज्यादा मतदान दर्ज किया गया। सबसे ज्यादा मतदान साउथ सलमारा मनकचर में 95.56 फीसदी रहा। वहीं सबसे कम मतदान वेस्ट कार्बी एंगलोंग में 75.25 फीसदी दर्ज किया गया। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि जनता ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। आमतौर पर ज्यादा मतदान को बदलाव की इच्छा से जोड़ा जाता है। हालांकि कुछ मामलों में यह सरकार के समर्थन का संकेत भी होता है। ऐसे में इस बार का वोटिंग पैटर्न राजनीतिक विश्लेषकों के लिए अहम बन गया है।
ये भी पढ़ें: Salman Khan-Nayanthara : सलमान-नयनतारा का ग्रैंड एक्शन एंटरटेनर शुरू, मुंबई में पहला शेड्यूल
अगर 2016 और 2021 के चुनावों को देखें तो वोटिंग प्रतिशत और नतीजों में सीधा संबंध दिखता है। 2016 में करीब 84.7 फीसदी मतदान हुआ था और सत्ता परिवर्तन हुआ था। बीजेपी पहली बार सत्ता में आई थी। वहीं 2021 में मतदान घटकर 82.42 फीसदी रह गया और सरकार बरकरार रही। इससे यह साफ होता है कि वोटिंग में गिरावट या बढ़ोतरी का असर चुनाव परिणामों पर पड़ता है। इस बार मतदान में बढ़ोतरी हुई है, जिससे राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि यह ट्रेंड हर बार एक जैसा नहीं रहता, लेकिन संकेत जरूर देता है।
असम के राजनीतिक इतिहास में कई बार देखा गया है कि वोटिंग प्रतिशत में बड़ा बदलाव सत्ता परिवर्तन का कारण बना है। 2001 में मतदान में बढ़ोतरी हुई और सरकार बदल गई। 1996 और 1991 के चुनावों में भी वोटिंग में बदलाव के साथ सत्ता बदली थी। वहीं 1978 और 1983 के चुनावों में भी मतदान प्रतिशत में उतार-चढ़ाव ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए थे। कई बार एक-दो फीसदी का अंतर भी निर्णायक साबित हुआ है। इससे यह साफ है कि असम में वोटिंग प्रतिशत केवल आंकड़ा नहीं बल्कि सियासी दिशा तय करने वाला फैक्टर है।
ये भी पढ़ें: ‘कारा’ में दिखेगा इंटरनेशनल टच : निर्देशक विग्नेश राजा की बड़ी सोच, धनुष बनेंगे बागी लुटेरे
इस बार करीब साढ़े तीन फीसदी ज्यादा मतदान हुआ है, जो अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल इसे अपने-अपने तरीके से देख रहे हैं। सत्ताधारी दल इसे समर्थन का संकेत बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे बदलाव की लहर मान रहा है। असम में पहले भी देखा गया है कि जब वोटिंग में बड़ा उछाल आता है तो सत्ता परिवर्तन की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि यह पूरी तरह तय नहीं होता, लेकिन संकेत जरूर मजबूत होते हैं। अब सभी की नजरें चुनाव परिणामों पर हैं, जो यह तय करेंगे कि बढ़ा हुआ मतदान किसके पक्ष में गया है।