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High Court News : असंतोषजनक रिपोर्ट पर हाईकोर्ट नाराज, IAS भरत यादव तलब

रेवेन्यू इंस्पेक्टर (RI) की पदोन्नति से जुड़े अवमानना मामले में हाईकोर्ट ने IAS भरत यादव को तलब किया है। सीधी जिले के इस केस की सुनवाई बुधवार 15 अप्रैल को होगी।
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असंतोषजनक रिपोर्ट पर हाईकोर्ट नाराज, IAS भरत यादव तलब
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    जबलपुर। सीधी जिले के एक रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पदोन्नति से जुड़े मामले में पेश की गई रिपोर्ट को हाईकोर्ट ने असंतोषजनक ठहराया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने इस बारे में दाखिल अवमानना याचिका पर कड़ा रुख अपनाते हुए शहरी विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन आयुक्त आईएएस भरत यादव को तलब किया है। मामले पर अगली सुनवाई 15 अप्रैल को निर्धारित की है।

    आयुक्त के रूप में खारिज की थी पदोन्नति सिफारिश 

    अवमानना का यह मामला सीधी जिले की रामपुर नैकिन नगर पालिका में पदस्थ आलोक कुमार सिंह की ओर से दाखिल किया गया है। आवेदक का कहना है कि 14 अक्टूबर 2021 को नगर पालिका की जिला पदोन्नति समिति की बैठक में पांच उम्मीदवारों में से उसको रेवेन्यू इंस्पेक्टर के पद पर पदोन्नति की सिफारिश की गई। इस सिफारिश को शहरी विकास एवं आवास विभाग के तत्कालीन आयुक्त द्वारा 20 जून 2022 को खारिज कर दिया गया।

    2023 में लगाई थी याचिका

    इसके खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर 2023 को न केवल आयुक्त का आदेश खारिज किया, बल्कि 90 दिनों के भीतर जिला पदोन्नति समिति के सिफारिश के मुताबिक आवेदक को प्रमोशन देने के आदेश दिए। इस आदेश का पालन न होने पर यह अवमानना याचिका दायर की गई।

    दो रिपोर्ट असंतोषजनक थीं

    मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने दलीलें रखीं। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पूर्व में दो रिपोर्ट पेश की जा चुकी हैं, लेकिन वे असंतोषजनक थीं। इसे गंभीरता से लेते हुए अदालत ने तत्कालीन आयुक्त को हाजिर होकर जवाब पेश करने के निर्देश दिए।

    'दुकानें बनीं तो भगदड़ और हादसों का खतरा बढ़ेगा’ 

    मप्र हाईकोर्ट ने खंडवा के प्रसिद्ध नवचंडी माता मंदिर मेला क्षेत्र में नई दुकानों के निर्माण पर रोक लगा दी है। जस्टिस विवेक जैन की सिंगल बेंच ने कहा है कि वहां पर किसी भी प्रकार की स्थाई या अस्थाई दुकानों के बनने से गली संकरी हो जाएगी, जिससे भगदड़ और हादसों का खतरा बढ़ जाएगा। जिस स्थान पर इन दुकानों का निर्माण होना था, अदालत ने उसे पार्किंग, फायर ब्रिगेड और पुलिस कर्मियों के बैठने के लिए आरक्षित रखने कहा है। यह आदेश तब तक प्रभावी रहेगा, जब तक कि निचली अदालत में लंबित सिविल सूट का निराकरण नहीं हो जाता।

    धार्मिक आयोजन में होगी बाधा

    अदालत ने यह फैसला खंडवा के चंपानगर में रहने वाली मीना वर्मा की ओर से दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर दिया। दरअसल, करीब 5  एकड़ भूमि पर नवचंडी मेला के आयोजन के लिए नगर निगम द्वारा बाउण्ड्रीवॉल और सड़क के बीच खाली जगह पर दुकानों का निर्माण कराया जा रहा था। याचिकाकर्ता ने इसे धार्मिक आयोजन में बाधा और सुरक्षा खतरा बताते हुए निचली अदालत में सिविल सूट दाखिल किया था। वहां से यह कहते हुए याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं मिली थी कि यह पब्लिक प्रोजेक्ट है। इस पर यह याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी।

    ट्रायल कोर्ट का आदेश पलटा

    मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता साकेत अग्रवाल ने दलीलें रखीं। सुनवाई के बाद अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को गलत ठहराते हुए उसका आदेश पलट दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि मेला क्षेत्र में खाली छोड़ी गई जगह पार्किंग, भीड़ नियंत्रण और आपात सेवाओं के लिए जरूरी है। वहां पर दुकानों का निर्माण होने से भगदड़ और हादसों का खतरा बढ़ जाएगा। इस मत के साथ अदालत ने याचिका मंजूर करके निचली अदालत का आदेश रद्द करके दुकानों के निर्माण पर रोक लगा दी।

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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