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CG NEWS :हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सरकारी कर्मचारी का निलंबन स्वतः होगा समाप्त

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग के निलंबित अधिकारी की याचिका स्वीकार करते हुए निलंबन आदेश किया निरस्त, नियम 9(5)(ए) का दिया हवाला। राज्य शासन ने 9 जनवरी 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि निलंबन के बाद विभाग ने निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर उन्हें चार्जशीट नहीं सौंपी और न ही निलंबन अवधि बढ़ाने का कोई आदेश जारी किया।
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 90 दिन में चार्जशीट नहीं तो सरकारी कर्मचारी का निलंबन स्वतः होगा समाप्त

RAIPUR NEWS। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी शासकीय कर्मचारी को निलंबित किए जाने के 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) नहीं दिया जाता या निलंबन अवधि को विधिसम्मत तरीके से आगे नहीं बढ़ाया जाता, तो ऐसा निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा। इस फैसले को सरकारी कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है।

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90 दिन में चार्जशीट नहीं तो निलंबन खत्म

हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि निलंबन कोई अनिश्चितकालीन दंड नहीं हो सकता। यदि विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर कर्मचारी को आरोप पत्र उपलब्ध नहीं कराता है और न ही निलंबन बढ़ाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करता है, तो कर्मचारी का निलंबन स्वतः समाप्त माना जाएगा। कोर्ट ने इस मामले में नियमों के पालन को अनिवार्य बताया।

क्या है पूरा मामला

उत्तर बस्तर कांकेर स्थित आरईएस कॉलोनी निवासी एमके खरे लोक निर्माण विभाग में पदस्थ थे। राज्य शासन ने 9 जनवरी 2026 को उन्हें निलंबित कर दिया था। हालांकि निलंबन के बाद विभाग ने निर्धारित 90 दिनों की अवधि के भीतर उन्हें चार्जशीट नहीं सौंपी और न ही निलंबन अवधि बढ़ाने का कोई आदेश जारी किया।

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याचिकाकर्ता ने कोर्ट में दी चुनौती

एमके खरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 9(5)(ए) के तहत 90 दिनों के भीतर आरोप पत्र जारी करना आवश्यक है। नियम का पालन नहीं होने की स्थिति में कर्मचारी सेवा में बहाली का अधिकार रखता है। याचिका में विभाग पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया।

कोर्ट ने माना नियमों का उल्लंघन

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताई। जस्टिस बीडी गुरु की एकलपीठ ने पाया कि विभाग निर्धारित समय सीमा में आरोप पत्र देने और निलंबन बढ़ाने संबंधी कोई वैधानिक कार्रवाई नहीं कर पाया। इसे नियमों का उल्लंघन मानते हुए कोर्ट ने निलंबन आदेश को निरस्त कर दिया।

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सरकारी कर्मचारियों पर पड़ेगा व्यापक असर

कानूनी जानकारों का मानना है कि हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। इससे सरकारी विभागों पर समयबद्ध कार्रवाई का दबाव बढ़ेगा और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित होगी। साथ ही विभागों को निलंबन संबंधी मामलों में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन करना होगा।

Prem Nirmalkar
By Prem Nirmalkar
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