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डॉ. मोहन यादव सरकार के दो साल :मप्र में पर्यटन की नई उड़ान, विरासत से धार्मिक स्थलों तक के लिए बड़े प्लान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल में मप्र के पर्यटन को नए पंख लगे हैं। विरासत को संभालकर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया गया है तो धार्मिक स्थलों पर नए सिरे से विकास कार्य किए जा रहे हैं।
मप्र में पर्यटन की नई उड़ान, विरासत से धार्मिक स्थलों तक के लिए बड़े प्लान
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल।  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश में पर्यटन की विशेष चर्चा है। प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को सहेजकर उसे वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की पहलें लगातार तेज हुई हैं। साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक स्थलों को नए स्वरूप में विकसित करने के लिए विभिन्न परियोजनाएं आगे बढ़ाई जा रही हैं, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के अनुभव में सुधार दिखाई देता है। साथ ही हमारे वन्य प्राणी भी दुनिया को लुभा रहे हैं। श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीते पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं। 

    प्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व क्षेत्र बना रातापानी

    रातापानी, मप्र का 8वां टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया है। यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है जो भोपाल के बेहद नजदीक है। यहां लगभग 90 से ज्यादा बाघ और अन्य वन्य जीव भी हैं। शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क को भी टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। 

    धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा 

    महाकाल लोक, ओंकारेश्वर महालोक, श्रीराम वनगमन पथ, देवी लोक, राजाराम लोक और हनुमान लोक जैसी परियोजनाओं ने धार्मिक  पर्यटन को न केवल आध्यात्मिक बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाया है। मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव ने निर्णय लिया है कि जहां-जहां भगवान श्रीकृष्ण के पग पड़े हैं, उन स्थानों को धार्मिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा। नारायणाधाम को तीर्थधाम के रूप में विकसित किया जा रहा है।  पंचक्रोशी मार्ग पर स्थाई पड़ाव बनाने के लिए अधोसंरचात्मक कार्य किए जायेंगे।  चित्रकूट सहित राम वन पथ गमन मार्ग के सभी प्रमुख स्थलों का विकास करने का निश्चय किया गया।

     मप्र में हेरिटेज टूरिज्म

    सांची के स्तूप, खजुराहो के मंदिर, भीमबेठका की गुफाएं, ग्वालियर का किला, मांडू का जहाज महल और ओरछा का राजमहल जैसे स्थल न केवल ऐतिहासिक महत्व के हैं, बल्कि वैश्विक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र भी है। यही बात है कि वर्ष 2024 में 80 लाख से अधिक पर्यटकों ने इन विरासत स्थलों का दौरा किया। वर्ष 2023 में यह संख्या 64 लाख पर्यटक थी। इसके साथ ही वन्यजीव पर्यटन, प्राकृतिक पर्यटन, शहरी पर्यटन, ग्रामीण पर्यटन, फिल्म पर्यटन का प्रदेश में लगातार विस्तार हो रहा है।

     2024 में आए 13 करोड़ से ज्यादा पर्यटक 

    प्रदेश ने दो साल में पर्यटन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा है। वर्ष 2024 में 13 करोड़ 41 लाख से अधिक पर्यटक मध्यप्रदेश की धरती पर आए। उज्जैन में 7.32 करोड़ पर्यटक पहुंचे जो 2023 के 5.28 करोड़ की तुलना में 39 प्रतिशत की वृद्धि है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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