पुष्पेंद्र सिंह, भोपाल। मध्यप्रदेश में आस्था और विश्वास से जुड़े ऐसे कई हनुमान मंदिर हैं जो अपनी अनोखी परंपराओं और चमत्कारी मान्यताओं के कारण देशभर में अलग पहचान रखते हैं। इन मंदिरों में सिर्फ पूजा-अर्चना ही नहीं होती, बल्कि यहां से जुड़ी कहानियां और अनुभव लोगों की गहरी आस्था को और मजबूत करते हैं। कहीं हनुमानजी डॉक्टर के रूप में रोग दूर करते हैं, तो कहीं उनके दरबार में मामलों का निपटारा होता है।
दंदरौआ धाम को डॉक्टर हनुमान के नाम से जाना जाता है।

यहां हनुमानजी को सफेद कोट पहने डॉक्टर के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि शिवकुमार दास नाम के एक साधु कैंसर से पीड़ित थे। एक रात हनुमानजी ने उन्हें डॉक्टर के वेश में दर्शन दिए, जिसके बाद वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए। तभी से यह मंदिर डॉक्टर हनुमान के रूप में प्रसिद्ध हो गया।

समझौता वाले हनुमान मंदिर में लोग अपने विवाद लेकर आते हैं। मान्यता है कि यहां भगवान के सामने कोई झूठ नहीं बोलता, जिससे सालों पुराने विवाद भी जल्दी सुलझ जाते हैं। कई लोग पुलिस के साथ-साथ यहां भी न्याय की गुहार लगाते हैं।

अर्जी वाले हनुमान मंदिर को आधुनिक समय में “व्हाट्सऐप वाले हनुमानजी” भी कहा जाने लगा है। पहले भक्त यहां कागज पर अर्जी लगाते थे, लेकिन अब देश-विदेश से लोग मैसेज के जरिए अपनी मनोकामनाएं भेजते हैं। यह मंदिर उन लोगों के लिए खास है जो दूर होने के कारण अन्य धाम नहीं जा पाते।

उल्टे हनुमान मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा उल्टी अवस्था में स्थापित है। मान्यता है कि अहिरावण का वध करने पाताल जाते समय वे इसी मुद्रा में यहां प्रकट हुए थे।

लंबे पैर वाले हनुमान मंदिर की प्रतिमा का एक पैर इतना लंबा है कि उसका अंतिम छोर आज तक नहीं मिला। यहां हनुमानजी भगवान राम के साथ नहीं बल्कि माता जानकी के साथ विराजमान हैं, जो इस मंदिर को और खास बनाता है।

चिरहुला हनुमान मंदिर को “जिला न्यायालय” का दर्जा मिला हुआ माना जाता है। करीब 500 साल पुराने इस मंदिर में भक्त अपनी समस्याएं अर्जी के रूप में रखते हैं और मान्यता है कि यहां न्याय जरूर मिलता है।

रीवा में ही स्थित रामसागर हनुमान मंदिर को हाईकोर्ट और खेमसागर हनुमान मंदिर को सुप्रीम कोर्ट के रूप में माना जाता है। कहा जाता है कि यदि चिरहुला धाम में मनोकामना पूरी न हो, तो भक्त इन मंदिरों का रुख करते हैं। तीनों मंदिर एक ही दिशा में स्थित हैं और आस्था का अनोखा केंद्र माने जाते हैं।

माधवगढ़ किला हनुमान मंदिर के पीछे स्थित इस मंदिर में हनुमानजी की प्रतिमा बेहद अनोखी है। करीब 1100 साल पुरानी इस प्रतिमा में हनुमानजी किशोरावस्था में, दाढ़ी-मूंछ के साथ नजर आते हैं। यहां उन्हें “जॉब वाले हनुमान” के रूप में भी पुकारा जाता है।

रणजीत हनुमान मंदिर में हनुमानजी को विजय के देवता के रूप में पूजा जाता है, जबकि गिरनारी हनुमान मंदिर में उनका शांत और साधना स्वरूप देखने को मिलता है। यहां मानसिक शांति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति की मान्यता जुड़ी हुई है।
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हनुमान धारा मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, लंका दहन के बाद हनुमानजी की तपन शांत करने के लिए भगवान राम ने यहां जलधारा प्रकट की थी। आज भी यह स्थान शांति और आस्था का केंद्र माना जाता है। मध्यप्रदेश के ये हनुमान मंदिर सिर्फ पूजा स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और अनोखी परंपराओं के जीवंत उदाहरण हैं। यहां आने वाला हर भक्त अपने साथ एक उम्मीद लेकर आता है और यही उम्मीद इन धामों को विशेष बनाती है।