भोपाल के गुरुवन में होली पर गूंजी स्वर लहरी, गुरु-शिष्य परंपरा के तहत विभिन्न रागों और बंदिशों पर दी गई प्रस्तुति

भोपाल। रंगों के त्योहार होली में गुरु-शिष्य परंपरा का भी अपना महत्व है। इसी परंपरा को निभाते हुए रंगों के त्योहार पर गुरुवन में पं किरण देशपांडे की उपस्थित में होली मिलन का आयोजन किया गया। इस दौरान विभिन्न रागों पर दी गई प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रही। बता दें कि, गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से भारतीय शास्त्रीय संगीत के संवर्धन में वरिष्ठ संगीत गुरु पं किरण देशपांडे के सानिध्य में "गुरुवन" द्वारा युवा पीढ़ी को प्रेरित करने का काम पूर्ण निष्ठा और समर्पण से किया जा रहा है। इसी कड़ी में होली मिलन का आयोजन किया गया।
सरस्वती वंदना से हुई शुरुआत
सभा की शुरुआत राग झिंझोटी एवं राग खमाज में निबद्ध सरस्वती वंदना से हुई। जिसके बोल थे- नमो नमो जयश्री सरस्वती दयानी एवं जय जगदीश हरे। इसे मृत्युन्जय सिंह, सत्यम दुबे, रिशिता कुशवाह एवं समीक्षा पात्रिकर ने प्रस्तुत किया। जिसके बाद युवा कलाकार संगीता गोस्वामी ने होली पर आधारित उपशास्त्रीय गायन प्रस्तुत करते हुए राग मधुवन्ति में पनघटवा कैसे जाऊं री, राग देस में रंग डारो ना डारो ना, राग काफी में खेलत श्याम सखी होरी श्याम सू.. गाया।
अंकित मलिक ने दी सुगम संगीत की प्रस्तुती
इसके साथ ही मीरा बाई का प्रसिद्ध भजन मारत मेरे नैन में पिचकारी श्याम आदि में निबद्ध छोटा खयाल की बंदिशे प्रस्तुत किया। सुप्रसिद्ध पारंपरिक बंदिश "खेले मसाने में होरी दिगंबर खेले मसाने में होली" गाकर भी उपस्थित श्रोताओं को मंत्र मुग्ध कर दिया। इसके बाद अंकित मलिक ने सुगम संगीत की प्रस्तुती दी। एक से बढ़कर एक फिल्मी नगमे सुनाते हुए अंकित ने कार्यक्रम में, आपकी निगाह ने कहा कुछ जरूर है, मुझे रात दिन बस मुझे चाहती हो, मदहोश दिल की धड़कन चुप सी तन्हाई सुनाया और समापन "आओगे जब तुम ओ साजना अंगना फूल खिलेंगे" से किया।











