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फिर जेल से बाहर आएगा राम रहीम :इस बार मिली 40 दिन की पैरोल, रेप केस में 20 साल की काट रहा सजा

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को रोहतक की सुनारिया जेल से 15वीं बार 40 दिन की पैरोल मिली है। वर्तमान में वह रेप केस में 20 साल की सजा काट रहे हैं। पैरोल के दौरान राम रहीम सिरसा में डेरा हेडक्वार्टर में रहेंगे और जेल प्रशासन ने सुरक्षा और नियमों का पूरा ध्यान रखा है।
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इस बार मिली 40 दिन की पैरोल, रेप केस में 20 साल की काट रहा सजा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को रोहतक की सुनारिया जेल से 15वीं बार पैरोल मिली है। इस बार उन्हें 40 दिन की पैरोल दी गई है, जिसमें वह डेरा सच्चा सौदा हेडक्वार्टर, सिरसा में रहेंगे। वर्तमान में राम रहीम अपने दो चेलों के साथ 20 साल की जेल की सजा काट रहे हैं, जो उन्हें 2017 में दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में सुनाई गई थी।

    जेल में सजा और पिछले पैरोल का रिकॉर्ड

    गुरमीत राम रहीम पर कुल तीन क्रिमिनल केस चल रहे हैं। 25 अगस्त 2017 को साध्वी यौन शोषण मामले में 20 साल की सजा मिली। इसके बाद 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्या मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई। वहीं डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में अक्टूबर 2021 में CBI कोर्ट ने उम्रकैद दी, लेकिन हाईकोर्ट ने तीन साल बाद उन्हें बरी कर दिया।

    राम रहीम 2017 से जेल में हैं और पैरोल या फरलो लेकर अब तक 14 बार जेल से बाहर आ चुके हैं। उनका पहला पैरोल 24 अक्टूबर 2020 को एक दिन के लिए हुआ था। इसके बाद वह अपनी बीमार मां से मिलने, जन्मदिन मनाने और अन्य विशेष परिस्थितियों में पैरोल पर बाहर आए। पिछले पैरोल का रिकॉर्ड इस प्रकार है:

    • 21 मई 2021 - 12 घंटे (बीमार मां से मिलने के लिए)
    • 7 फरवरी 2022 - 21 दिन
    • जून 2022 - 30 दिन
    • 14 अक्टूबर 2022 - 40 दिन
    • 21 जनवरी 2023 - 40 दिन
    • 20 जुलाई 2023 - 30 दिन
    • 21 नवंबर 2023 - 21 दिन
    • 19 जनवरी 2024 - 50 दिन
    • 13 अगस्त 2024 - 21 दिन
    • 2 अक्टूबर 2024 - 20 दिन
    • 28 जनवरी 2025 - 30 दिन
    • 9 अप्रैल 2025 - 21 दिन
    • 5 अगस्त 2025 - 40 दिन

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    पैरोल और फरलो क्या हैं?

    पैरोल एक विशेष अनुमति है, जो कैदी को सजा का कुछ हिस्सा काटने के बाद मिलती है। इसे सामान्यत: खास परिस्थितियों में दिया जाता है, जैसे परिवार में मृत्यु, बीमारी, शादी या अन्य जरूरी कारण। पैरोल दो तरह की होती है:

    रेगुलर पैरोल: कैदी आजाद रहता है।

    कस्टडी पैरोल: कैदी पुलिस की निगरानी में रहता है।

    वहीं, फरलो कैदी का कानूनी अधिकार है, जिसके लिए किसी विशेष परिस्थिति की जरूरत नहीं होती। फरलो के नियम और गाइडलाइन हर राज्य में अलग हैं, लेकिन प्रक्रियात्मक रूप से ज्यादातर राज्यों में समान ही हैं।

    इस बार गुरमीत राम रहीम सिंह की 15वीं पैरोल से डेरा सिरसा में फिर से हलचल की उम्मीद है। जेल प्रशासन का कहना है कि पैरोल के दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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