गुना (मक्सूदनगढ़)। जिले के मक्सूदनगढ़ वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि तस्कर न केवल अवैध लकड़ी तस्करी में लिप्त हैं, बल्कि उन पर कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर भी हमला करने से नहीं चूक रहे। रविवार को पार्वती नदी किनारे तस्करी की सूचना पर पहुंची टीम पर तस्करों ने जानलेवा हमला कर दिया। इस हमले में विभाग की सरकारी गाड़ी को गंभीर नुकसान पहुंचा है, हालांकि टीम के अधिकारी और कर्मचारी सुरक्षित बच निकलने में सफल रहे।
वन विभाग को रविवार को खेरड़ा गांव के पास पार्वती नदी किनारे लकड़ी की अवैध कटाई और तस्करी की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर वन विभाग की एक टीम तुरंत मौके के लिए रवाना हुई। टीम जैसे ही नदी क्षेत्र में पहुंची, वहां तस्करों से आमना-सामना हो गया।
जानकारी के अनुसार खुद को फंसता देख तस्करों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए टीम पर पत्थरों और डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में विभाग की सरकारी गाड़ी के शीशे टूट गए और वाहन को काफी क्षति पहुंची है। हमलावरों की संख्या ज्यादा थी, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
गनीमत रही कि टीम में शामिल किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को शारीरिक चोट नहीं आई। टीम ने साहस दिखाते हुए मौके से किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई और तत्काल मक्सूदनगढ़ स्थित वन कार्यालय को सूचना दी। पुलिस को भी घटना की जानकारी दी गई, जिसके बाद आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि यह क्षेत्र लंबे समय से लकड़ी तस्करी के लिए कुख्यात है और कई बार पहले भी ऐसे गिरोहों की गतिविधियां सामने आ चुकी हैं। वन विभाग के मुताबिक तस्कर कीमती लकड़ियों की अवैध कटाई और परिवहन में लिप्त हैं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए वन विभाग के अधिकारियों ने कहा है कि हमलावरों की पहचान की जा रही है और उनके खिलाफ वन अपराध अधिनियम सहित आपराधिक धाराओं में प्रकरण दर्ज किया जाएगा। विभाग का कहना है कि अब तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का दौर शुरू होगा और इस तरह की घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब वन अमले पर जानलेवा हमला हुआ है। इससे पूर्व मधुसूनगढ़ और उकावद वन क्षेत्र में भी तस्करों द्वारा अधिकारियों पर हमले किए जा चुके हैं। यह घटनाएं विभाग की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं और भविष्य में मजबूत कार्रवाई की मांग करती हैं।