स्पोर्ट्स न्यूज। टी20 वर्ल्ड कप 2026 के रोमांच और दबाव के बीच टीम इंडिया के स्टार फिनिशर रिंकू सिंह के जीवन में ऐसा दर्द आया, जिसने पूरे क्रिकेट जगत को भावुक कर दिया। उनके पिता खानचंद्र सिंह का शुक्रवार सुबह स्टेज-4 लिवर कैंसर से लंबी जंग के बाद निधन हो गया। वे 60 वर्ष के थे।
यह खबर जैसे ही सामने आई, क्रिकेट फैंस और खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई। एक ओर देश वर्ल्ड कप की उम्मीदों में डूबा है, वहीं दूसरी ओर रिंकू अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।
रिंकू सिंह के पिता पिछले करीब डेढ़ साल से लिवर कैंसर से जूझ रहे थे। हाल ही में उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अलीगढ़ से ग्रेटर नोएडा के ओमेगा-1 स्थित यथार्थ हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
अस्पताल के पीआरओ के अनुसार, उन्होंने 27 फरवरी की सुबह करीब 4:36 से 5 बजे के बीच अंतिम सांस ली। वे क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती थे और मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। उन्हें लगातार रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ।
पिता की गंभीर स्थिति की जानकारी मिलते ही रिंकू सिंह ने टी20 वर्ल्ड कप के बीच टीम कैंप छोड़ दिया था। वे चेन्नई से दिल्ली और फिर परिवार के पास पहुंचे थे। उस दौरान उन्हें प्रैक्टिस सेशन भी छोड़ना पड़ा।
हालांकि, टीम की जरूरत को देखते हुए वे बाद में वापस चेन्नई लौटे और जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले टीम से जुड़ गए। लेकिन प्लेइंग इलेवन में उन्हें जगह नहीं मिली। वे सब्स्टीट्यूट के तौर पर मैदान पर फील्डिंग करते नजर आए। अब पिता के निधन की खबर के बाद वे दोबारा अलीगढ़ के लिए रवाना हो चुके हैं।
रिंकू सिंह के पिता का सपना था कि, उनका बेटा टी20 विश्व कप 2026 में भारत के लिए ट्रॉफी जीते। कुछ समय पहले जब वर्ल्ड कप ट्रॉफी प्रदर्शित की गई थी, तब उन्होंने वीडियो कॉल पर रिंकू से कहा था- ये ट्रॉफी देख लो, इसे जीतकर लाना है।
यह भावुक पल आज हर क्रिकेट प्रेमी को याद आ रहा है। पिता का यह सपना अब रिंकू के लिए एक भावनात्मक मिशन बन चुका है।
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रिंकू सिंह का बचपन बेहद संघर्षों में बीता। वे उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के रहने वाले हैं। परिवार में पांच भाई हैं और आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी। उनके पिता खानचंद्र सिंह घर-घर गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे। कम आमदनी के बावजूद उन्होंने कभी बेटे के क्रिकेट सपने को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया, भले ही शुरू में पढ़ाई पर जोर देते रहे।

रिंकू ने एक इंटरव्यू में बताया था कि, वे और उनके भाई बाइक पर दो-दो सिलेंडर रखकर होटलों और घरों में डिलीवरी करने जाते थे। मोहल्ले के लड़कों के साथ पैसे मिलाकर गेंद खरीदी जाती थी। क्लब क्रिकेट खेलने के लिए पैसे नहीं थे, तो उन्होंने सरकारी स्टेडियम में कार्ड बनवाकर प्रैक्टिस की। एक बार टूर्नामेंट खेलने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो उनकी मां ने दुकान से उधार लेकर एक हजार रुपए दिए थे।
जब रिंकू सिंह आईपीएल में चमके और बाद में टीम इंडिया के लिए डेब्यू किया, तब भी उनके पिता ने गैस सिलेंडर डिलीवरी का काम नहीं छोड़ा। वे कहते थे कि इसी काम ने उनके परिवार को मुश्किल समय में संभाला है। टीम इंडिया में डेब्यू के बाद जब रिंकू घर लौटे, तो वे माता-पिता के लिए भारतीय टीम की जर्सी लेकर आए। उस दिन उनके पिता की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू थे।
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रिंकू सिंह इस वर्ल्ड कप में टीम इंडिया के लिए फिनिशर की भूमिका में खेल रहे हैं। वे छठे या सातवें नंबर पर बल्लेबाजी करते हैं। हालांकि, इस टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
कम बल्लेबाजी मौके और नीचे के क्रम में आने की वजह से उन्हें ज्यादा गेंदें खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन टीम मैनेजमेंट उन्हें अभी भी भरोसेमंद फिनिशर मानती है।

रिंकू सिंह की सगाई समाजवादी पार्टी की सांसद प्रिया सरोज से हो चुकी है। दोनों की रिंग सेरेमनी लखनऊ में हुई थी। शादी की तारीख दो बार आगे बढ़ चुकी है, पहले क्रिकेट सीरीज और फिर वर्ल्ड कप के कारण। परिवार के अनुसार, आईपीएल 2026 के बाद शादी काशी में होगी और रिसेप्शन अलीगढ़ में रखा जाएगा।
पिता के निधन की खबर सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस, क्रिकेटर और खेल जगत की हस्तियों ने संवेदना व्यक्त की। सभी ने रिंकू और उनके परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत और शक्ति की कामना की है।
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रिंकू सिंह के जीवन की कहानी संघर्ष, त्याग और मेहनत की मिसाल है। उनके पिता ने गरीबी में भी बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। आज भले ही वे इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका आशीर्वाद और सपना रिंकू के साथ है। अब जब भी रिंकू मैदान पर उतरेंगे, तो उनके हर शॉट में सिर्फ रन नहीं, बल्कि पिता के सपनों की गूंज होगी।
टी20 वर्ल्ड कप 2026 का यह सफर अब रिंकू के लिए सिर्फ टूर्नामेंट नहीं, बल्कि एक भावनात्मक मिशन बन चुका है, पिता के सपने को सच करने का मिशन।