डॉक्टर बने जीवनदाता!गुना जिला अस्पताल में दो जटिल प्रसव, लौटाई नई जिंदगी

गुना के जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश राजपूत और टीम ने एक बार फिर मासूम जान बचाई हैं। उन्होंने दो अलग-अलग और जटिल प्रसव मामलों में अपनी टीम के साथ मिलकर सफल ऑपरेशन किए। इन ऑपरेशन में दोनों प्रसूताओं की जान बची और परिवारों में खुशी लौट आई।
बच्चादानी फटने पर भी बचाई जान
पहला मामला पिपरई (अशोकनगर) की रहने वाली राजाना खान का था। राजाना दूसरी बार गर्भवती थीं और उनका पहला बच्चा भी सिजेरियन (ऑपरेशन) से हुआ था। प्रसव के दौरान उन्हें लगातार दर्द और तेज रक्तस्राव हुआ। साथ ही बच्चे की धड़कन भी कमजोर होती जा रही थी।
डॉ. सतीश राजपूत ने स्थिति को गंभीर मानते हुए तुरंत परिवार को बताया और ऑपरेशन का निर्णय लिया। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि राजाना की बच्चादानी फट चुकी थी। यह स्थिति बहुत खतरनाक होती है और मरीज की जान पर बड़ा खतरा रहता है। फिर भी डॉ. राजपूत और उनकी टीम ने जल्दी और समझदारी से काम किया।
ऑपरेशन के दौरान खून चढ़ाया गया और समय पर इलाज कर राजाना और बच्चे दोनों को सुरक्षित बचा लिया गया। यह सफलता अस्पताल और डॉक्टर के लिए गर्व की बात बन गई।
निजी अस्पतालों ने हाथ खड़े कर दिए
दूसरा मामला हाट बरखेड़ा के रहने वाले सुनील कुशवाहा की पत्नी रेखा का था। यह केस इतना जटिल था कि कई निजी अस्पतालों ने इलाज से इनकार कर दिया और उन्हें शिवपुरी या भोपाल जाने की सलाह दे दी। परिजन परेशान और निराश हो गए।
उसी समय सुनील ने डॉ. सतीश राजपूत से संपर्क किया। डॉक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और बिना किसी देरी के अस्पताल में ही ऑपरेशन करने का निर्णय लिया। सुनील के लिए यह मदद किसी वरदान से कम नहीं थी।
रेखा की यह चौथी प्रेग्नेंसी थी और उनके दो बेटियां पहले ही हैं। पहले एक बेटी का निधन भी हो चुका था। ऐसे में परिवार की चिंता और बढ़ गई थी। फिर भी डॉ. राजपूत की टीम ने ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया और रेखा ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। यह खबर सुनकर परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
टीमवर्क से मिली सफलता
ये दोनों सफल ऑपरेशन सिविल सर्जन के मार्गदर्शन में डॉ. सतीश राजपूत और उनकी टीम ने किए। इस टीम में कई डॉक्टर और स्टाफ शामिल थे, जिनका योगदान महत्वपूर्ण रहा।

टीम में डॉ. आरती श्रीवास्तव, डॉ. विकास राजपूत, एमओ डॉक्टर इशा अग्रवाल (एनेस्थेटिस्ट), नर्सिंग स्टाफ दीपक कुशवाहा, गोविंद ओझा, सिस्टर माधुरी यादव, वार्ड बॉय सुरेखा बाई अहिरवार, गिर्राज धौलपुरिया और स्टाफ सदस्य रघुराज, गोविंद और सोनू शामिल थे। इन सभी की मेहनत और तत्परता के कारण ऑपरेशन सफल हुआ।
परिवार ने जताया आभार
परिजनों ने डॉ. सतीश राजपूत की संवेदनशीलता और समय पर इलाज की तारीफ की। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को धन्यवाद दिया। इस सफलता ने यह साबित किया कि सही इलाज और मानवता से बड़ी से बड़ी समस्या भी हल की जा सकती है।











