भोपाल:नगर निगम में ₹14.69 लाख का टैक्स घोटाला, 106 फर्जी रसीदें काटकर लाखों की हेराफेरी; 4 महीने तक दबा रहा मामला

भोपाल नगर निगम एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है। इस बार Bhopal Nagar Nigam में 14.69 लाख रुपए के प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर घोटाले का खुलासा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि अधिकारियों को मार्च 2026 में ही पूरे फर्जीवाड़े की जानकारी मिल गई थी लेकिन मामला करीब चार महीने तक दबाकर रखा गया। आखिरकार 5 जुलाई को FIR दर्ज की गई। दोनों आरोपी गिरफ्तार होकर जेल पहुंच चुके हैं लेकिन नगर निगम ने अब तक उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की हैं।
नेशनल लोक अदालत के दौरान काटी गईं 106 फर्जी रसीदें
यह पूरा घोटाला National Lok Adalat के दौरान सामने आया। एफआईआर के अनुसार 14 मार्च 2026 को वार्ड-33 के वार्ड प्रभारी रघुवीर तिवारी की यूजर आईडी का दुरुपयोग कर 106 फर्जी प्रॉपर्टी टैक्स और जलकर रसीदें जारी की गईं। इन रसीदों में 14 लाख 69 हजार 798 रुपए टैक्स जमा होना दर्शाया गया, लेकिन बैंक रिकॉर्ड के मिलान में रकम जमा नहीं मिली। इसके बाद जांच शुरू हुई तो बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
दूसरे वार्ड की आईडी से किया पूरा खेल
जांच में सामने आया कि वार्ड-24 के कंप्यूटर ऑपरेटर शिराज उलहक और योजना शाखा में पदस्थ मोहम्मद समीर खान ने इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया। आरोप है कि दोनों लोगों को आधी राशि में टैक्स जमा कराने का झांसा देकर नकद रकम वसूलते थे। इसके लिए उन्होंने वार्ड-24 की ऑपरेटर नाहिदा के माध्यम से वार्ड-33 के प्रभारी की यूजर आईडी और पासवर्ड हासिल किए। उसी आईडी का इस्तेमाल कर फर्जी टैक्स रसीदें जारी की गईं और लोगों से वसूली गई राशि का गबन कर लिया गया।
चार महीने तक नहीं हुई कार्रवाई
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब अधिकारियों को मार्च में ही पूरे मामले की जानकारी मिल गई थी और आरोपियों की भूमिका भी सामने आ गई थी तो FIR दर्ज कराने में चार महीने की देरी क्यों हुई? मामला जुलाई तक फाइलों में दबा रहा। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घोटाले ने नगर निगम के ऑनलाइन टैक्स सिस्टम की सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोल दी है। एक वार्ड की यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल दूसरे वार्ड में कर 106 फर्जी रसीदें जारी कर दी गईं और लंबे समय तक किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। अब पूरे सिस्टम के तकनीकी ऑडिट, साइबर सुरक्षा की समीक्षा और अन्य वार्डों के रिकॉर्ड की जांच की मांग तेज हो गई है।
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टैक्स जमा करने वाले ही बन गए बकायादार
घोटाले का सबसे बड़ा नुकसान उन नागरिकों को हुआ जिन्होंने आरोपियों को टैक्स की रकम देकर रसीदें हासिल कर ली थीं। बाद में जब रिकॉर्ड की जांच हुई तो पता चला कि निगम के खाते में पैसा जमा ही नहीं हुआ। नतीजतन जिन लोगों ने टैक्स भर दिया था उनके खातों में दोबारा वही टैक्स बकाया दिखाया जाने लगा। यानी नागरिकों को एक बार फिर भुगतान का नोटिस मिलने की स्थिति बन गई, जबकि गलती पूरी तरह निगम की व्यवस्था और कर्मचारियों की थी।
गिरफ्तारी हुई लेकिन नौकरी अब भी बरकरार
मामले में दोनों आरोपी कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इसके बावजूद नगर निगम ने अब तक उनकी सेवाएं समाप्त नहीं की हैं। साथ ही गबन की गई राशि की वसूली की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हुई है।
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दोषियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे
मामले पर नगर निगम की अपर आयुक्त अंजू अरुण कुमार का कहना है कि पूरे प्रकरण में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।












