रायपुर। हिंदी साहित्य के वरिष्ठ और प्रतिष्ठित कवियों में शुमार विनोद कुमार शुक्ल का आज निधन हो गया। उन्होंने 89 वर्ष की उम्र में अंतिम सांस ली। छत्तीसगढ़ के रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में उन्होंने अंतिम सांस ली।विनोद कुमार शुक्ल पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे।
सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें 2 दिसंबर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वे वेंटिलेटर पर ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। उनके निधन से हिंदी साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
विनोद कुमार शुक्ल को उनकी संवेदनशील और गहरी अर्थवत्ता वाली कविताओं के लिए विशेष पहचान मिली। “वह आदमी चला गया”, “नया गरम कोट पहिनकर विचार की तरह” और “सब कुछ होना बचा रहेगा” जैसी कविताओं में उन्होंने आम आदमी के जीवन, उसके अकेलेपन और मन के सूक्ष्म भावों को बेहद सरल भाषा में अभिव्यक्त किया। उनकी कविता में आकाश और धरती जैसे बिंब मानवीय संवाद करते नजर आते हैं, जो पाठक को भीतर तक छू जाते हैं।
कविता के साथ-साथ विनोद कुमार शुक्ल ने उपन्यास विधा में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। ‘नौकर की कमीज’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जैसे कालजयी उपन्यासों के जरिए उन्होंने भारतीय समाज की संवेदनाओं, वर्गीय संघर्ष और मानवीय रिश्तों को अलग अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी रचनाएं हिंदी साहित्य में सादगी, मौलिकता और गहरे मानवीय सरोकारों के लिए हमेशा याद की जाएंगी।
हिंदी साहित्य को समर्पित जीवन में विनोद कुमार शुक्ल ने अपनी कमल से लोगों के दिलों में गरी पहचान बनाई। जिसके कारण उन्हें साहित्यिक जीवन में कई पुरस्कारों से नवाज़ा गया। इनमें रज़ा पुरस्कार, शिखर सम्मान, मैथिली शरण गुप्त समेत कई बड़े सम्मानों शामिल है।