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फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों तक पहुंची मप्र के गोंड आर्ट की खासियत, राेशनी व्याम ने मुलाकात कर दी जानकारी

भोपाल की गोंड आर्टिस्ट रोशनी व्याम ने दिल्ली में फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी कला के बारे में मैक्रों को जानकारी दी। रोशनी के अनुसार यह मुलाकात उनके जीवन के अहम पलों में से एक रही।
 फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों तक पहुंची मप्र के गोंड आर्ट की खासियत, राेशनी व्याम ने मुलाकात कर दी जानकारी
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    प्रीति जैन, भोपाल। राजधानी भोपाल में रहने वाली और देश-दुनिया में गोंड आर्ट के अपने काम के जरिए पहचान बनाने वाली रोशनी व्याम ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों  व उनकी पत्नी ब्रिगिट मैक्रों से मुलाकात की। मौका था, दिल्ली स्थित फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया में कलाकारों के साथ संवाद सत्र के आयोजन का। रोशनी ने बताया, ‘मैं गोंड कला में इलेस्ट्रेशन का काम कर रही हूं, इसके जरिए कई देशों में काम करने का मौका मिला। इसी उपलब्धि के चलते मुझे इस आयोजन में शामिल होने का निमंत्रण मिला।

    भारत-फ्रांस की संस्कृति का सेतु

    रोशनी ने बताया कि यह विशेष कार्यक्रम उन सांस्कृतिक सेतु-निर्माताओं के लिए था जो भारत-फ्रांस की संस्कृति में सेतु के रूप में कार्य कर रहे हैं। जिनका समर्पण और सक्रिय सहभागिता फ्रांस और भारत के बीच सांस्कृतिक संबंधों को सदृढ़ एवं सतत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।  हाल ही में मैंने बर्लिन स्थित पहल स्पोर के सहयोग से महिला सामूहिक प्रदर्शनी सुरतेली का क्यूरेशन किया।

    पद्मश्री दुर्गाबाई व्याम की बेटी हैं रोशनी

    रोशनी कहती हैं, मेरी मां दुर्गाबाई व्याम को गोंड कला के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। मैंने अपनी ग्रेजुएशन के लिए एमएस यूनिवर्सिटी, बड़ौदा के आर्ट डिपार्टमेंट में एडमिशन लिया। वहां मुझे लगा कि उनका करिकुलम बहुत रेगुलर और वेस्टर्नाइज्ड है और वहां मैं गोंड जड़ों से कट जाउंगी। तब मैंने आर्ट स्कूल में एडमिशन न लेने का फैसला किया। मैंने अपनी प्रैक्टिस जारी रखी और एनआईएफटी, बेंगलुरु में टेक्सटाइल डिजाइनिंग करने का फैसला किया, जहां मुझे अपनी पारंपरिक कला को आज के फैशन में अपनाने के लिए बढ़ावा दिया गया।

    2022 में दुर्गाबाई व्याम को मिला था पद्मश्री

    दुर्गाबाई व्याम मध्यप्रदेश की प्रसिद्ध गोंड कलाकार और पद्मश्री सम्मानित शख्सियत हैं। वे अपनी पारंपरिक गोंड चित्रकला के माध्यम से आदिवासी जीवन, प्रकृति और लोककथाओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती हैं। उनकी कला में पेड़-पौधे, जीव-जंतु और लोकविश्वासों का अनोखा संगम देखने को मिलता है। दुर्गाबाई ने अपनी विशिष्ट शैली से गोंड कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है। उन्होंने कई पुस्तकों का चित्रांकन भी किया है, जिनमें आदिवासी संस्कृति की गहरी झलक मिलती है। वर्ष 2022 में उन्हें कला क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया, जिससे मध्यप्रदेश का गौरव बढ़ा।रोशनी इन्ही दुर्गाबाई की बेटी है। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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